(अपडेट) जम्मू-कश्मीर में लश्कर से जुड़े 10 ठिकानों पर एनआईए का छापा
नई दिल्ली, 12 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संचालकों और उनके स्थानीय सहयोगियों से जुड़े सीमा पार आतंकी षड्यंत्र मामले में 10 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कुपवाड़ा, कुलगाम, बांदीपोरा, बारामूला और सोपोर में की गई। इस दौरान मामले से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई है।
एनआईए के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य लश्कर संचालकों और स्थानीय भूमिगत कार्यकर्ताओं के नेटवर्क से जुड़े साक्ष्य जुटाना तथा घुसपैठ कर आए आतंकियों को ठिकाना, आवाजाही और अन्य रसद सहायता उपलब्ध कराने वालों की भूमिका का पता लगाना है।
मामला मूल रूप से श्रीनगर के जकूरा थाने में 0024/2026 नंबर की प्राथमिकी के रूप में दर्ज किया गया था। बाद में एनआईए ने इसे आरसी-02/2026/एनआईए/जेएमयू के रूप में फिर से दर्ज किया। मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, 1967, शस्त्र अधिनियम, 1959 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की संबंधित धाराओं के तहत जांच की जा रही है।
जांच की शुरुआत 31 मार्च 2026 की देर रात नाके पर लश्कर से जुड़े एक स्थानीय भूमिगत कार्यकर्ता की गिरफ्तारी के बाद हुई थी। उसके कब्जे से एक हथगोला और जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। आगे की जांच में षड्यंत्र से जुड़े पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई और स्थानीय सहायता नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की गई।
एनआईए के अनुसार, पाकिस्तान स्थित लश्कर संचालकों के स्थानीय सहयोगियों का इस्तेमाल घुसपैठ कर आए आतंकियों की आवाजाही और छिपाने, उन्हें ठिकाना उपलब्ध कराने, इलाके की रेकी करने तथा अन्य रसद सहायता के लिए किया जा रहा था।
जांच एजेंसी आतंकी नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, संचार माध्यमों, आरोपितों की आवाजाही तथा हथियारों और विस्फोटकों के स्रोत एवं आपूर्ति श्रृंखला की भी जांच कर रही है। बरामद सामग्री का अन्य साक्ष्यों के साथ मिलान कर पूरे नेटवर्क और उसकी गतिविधियों का पता लगाया जा रहा है।
एनआईए ने कहा कि शनिवार की छापेमारी व्यापक सीमा पार आतंकी षड्यंत्र और उसे सहायता देने वाले स्थानीय तंत्र की जांच का हिस्सा है। एजेंसी मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान और उनकी भूमिका निर्धारित करने में जुटी है। जांच के आधार पर आगे गिरफ्तारी और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर