बैंकों को फास्टैग से जुड़े वाहन पंजीकरण नंबरों की जांच के निर्देश

 


नई दिल्ली, 15 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ईटीसी) प्रणाली में डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए सभी फास्टैग जारी करने वाले बैंकों को निर्देश दिया है कि वे तत्काल उन वाहनों के पंजीकरण नंबर (वीआरएन) की जांच करें जो उनके द्वारा जारी किए गए फास्टैग से जुड़े हैं।

केद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बताया कि यह निर्णय उस समय लिया गया जब शिकायतें सामने आईं कि फास्टैग रीडर द्वारा दर्ज किया गया वाहन पंजीकरण नंबर कई बार वाहन की नंबर प्लेट पर प्रदर्शित वास्तविक नंबर से मेल नहीं खाता। ऐसी विसंगतियां प्रवर्तन तंत्र को कमजोर कर सकती हैं और सरकारी राजस्व की चोरी के साथ-साथ मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत दंडात्मक प्रावधानों को भी प्रभावित कर सकती हैं।

एनएचएआई ने बताया कि अधिकांश ऐसे मामले उन फास्टैग से जुड़े हैं जो उस समय जारी किए गए थे जब फास्टैग जारी करने की प्रक्रिया को ‘वाहन’ डेटाबेस से नहीं जोड़ा गया था। उस अवधि में सत्यापन तंत्र सीमित था और मैनुअल प्रक्रियाओं पर अधिक निर्भरता थी, जिससे वाहन पहचान रिकॉर्ड में असंगतियां उत्पन्न हुईं।

प्राधिकरण ने बताया कि फास्टैग के साथ वीआरएन का सही मैपिंग सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर आगामी तकनीक आधारित पहल जैसे मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग को ध्यान में रखते हुए। एमएलएफएफ ढांचे के तहत गैर-अनुपालन वाहनों को इलेक्ट्रॉनिक नोटिस जारी करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाइयां सटीक और सत्यापित वाहन पहचान डेटा पर निर्भर करेंगी।

सभी फास्टैग जारी करने वाले बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने द्वारा जारी किए गए फास्टैग की तत्काल जांच करें और उन फास्टैग को ब्लैकलिस्ट करें जो गलत या अमान्य वीआरएन से जुड़े पाए जाते हैं। यह कार्रवाई सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर