चित्तौड़गढ़-उदयपुर राजमार्ग मामले में एनएचएआई को राहत, कंपनी के 366.53 करोड़ के दावे खारिज

 




नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राजस्थान के चित्तौड़गढ़-उदयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना से जुड़े मध्यस्थता मामले में अपनी संविदात्मक स्थिति का बचाव करते हुए बड़ी राहत हासिल की है। तीन सदस्यीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने रियायतधारी कंपनी उचित एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड के 366.53 करोड़ रुपये के दावों को खारिज कर दिया। वहीं, एनएचएआई के पक्ष में 33.54 करोड़ रुपये के मूलधन के प्रतिदावे स्वीकार किए गए हैं।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार यह मामला राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-76 के चित्तौड़गढ़-उदयपुर खंड को छह लेन का बनाने से जुड़ा है। 93.5 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की रियायतधारी कंपनी उचित एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड है, जिसे टीआरआईएल रोड्स प्राइवेट लिमिटेड का समर्थन प्राप्त है। विवाद से जुड़े दावों और प्रतिदावों की सुनवाई किफायती विवाद निवारण सोसायटी (सरोड) के तहत गठित तीन सदस्यीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने की।

न्यायाधिकरण ने कंपनी के कुल 366.53 करोड़ रुपये के दावे खारिज कर दिए। इसमें कोविड-19 के कारण परियोजना में देरी के लिए मांगी गई 238.18 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत का दावा भी शामिल था। न्यायाधिकरण ने कंपनी को केवल 14.51 करोड़ रुपये के दावे की अनुमति दी। इसके अलावा, 2.82 करोड़ रुपये की वापसी सशर्त मंजूर की गई।

एनएचएआई के प्रतिदावों में परियोजना के दायरे से हटाए गए कार्यों की वसूली के लिए 27 करोड़ रुपये, राजमार्ग के रखरखाव में विफलता के लिए 4.03 करोड़ रुपये और मार्च 2021 में परियोजना की निर्धारित पूर्णता तिथि के बाद अनधिकृत रूप से वसूले गए टोल के लिए 2.51 करोड़ रुपये शामिल हैं। इन मदों में न्यायाधिकरण ने एनएचएआई के पक्ष में कुल 33.54 करोड़ रुपये के मूलधन के प्रतिदावे स्वीकार किए।

मंत्रालय ने बताया कि एनएचएआई को हाल के महीनों में अन्य मध्यस्थता मामलों में भी राहत मिली है। जुलाई 2026 में बरेली हाईवेज प्रोजेक्ट लिमिटेड से जुड़े मामले में प्राधिकरण ने करीब 3,177 करोड़ रुपये के दावों का सफलतापूर्वक बचाव किया। जून 2026 में कर्नाटक की तुमकुर-चित्रदुर्ग छह लेन परियोजना से संबंधित मध्यस्थता मामले में 1,202 करोड़ रुपये का फैसला एनएचएआई के पक्ष में आया।

इसी तरह, अप्रैल 2026 में पानीपत-जालंधर राजमार्ग परियोजना से जुड़े दो मध्यस्थता मामलों का 819.96 करोड़ रुपये में निपटारा हुआ। इन मामलों में रियायतधारी के करीब 8,375 करोड़ रुपये के दावे और एनएचएआई के 2,888.64 करोड़ रुपये के प्रतिदावे शामिल थे। मई 2026 में गुजरात में राष्ट्रीय राजमार्ग-48 के कामरेज-चालथन खंड को छह लेन का बनाने से जुड़े मामले में ठेकेदार के करीब 174.49 करोड़ रुपये के दावे के मुकाबले न्यायाधिकरण ने केवल 54 लाख रुपये की राशि मंजूर की।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर