एनसीआर में धूल फैलाने वालों पर सख्ती, छोटे निर्माण स्थलों पर भी होगी कानूनी कार्रवाई

 


नई दिल्ली, 04 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में निर्माण स्थलों से होने वाले धूल प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने अपने नियमों में संशोधन करते हुए 500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाले निर्माण एवं ध्वस्तीकरण स्थलों पर धूल नियंत्रण नियमों का गंभीर उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है।

संशोधित आदेश के तहत अब एनसीआर के कई और नगर निगम, विकास प्राधिकरण, नगर परिषद, नगर बोर्ड और शहरी स्थानीय निकाय भी ऐसे मामलों में अदालत में अभियोजन दर्ज करा सकेंगे। साथ ही, वे जरूरत पड़ने पर निर्माण स्थल को बंद कराने और पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूलने की कार्रवाई भी कर सकेंगे।

सीएक्यूएम ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि

इस व्यवस्था का विस्तार मानेसर, करनाल, पानीपत, रोहतक, मेरठ, अलवर, भरतपुर, भिवाड़ी और नीमराना सहित कई शहरों तक किया गया है। आयोग का कहना है कि छोटे निर्माण कार्य भी बड़ी मात्रा में पीएम 10 और पीएम 2.5 धूल कणों के उत्सर्जन में योगदान देते हैं, इसलिए इन पर प्रभावी निगरानी जरूरी है।

सीएक्यूएम ने सभी संबंधित एजेंसियों को हर महीने शिकायतों, दर्ज अभियोगों और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट आयोग को भेजने का निर्देश भी दिया है ताकि निगरानी और जवाबदेही मजबूत हो सके।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच दिल्ली में 16,195, हरियाणा (एनसीआर) में 909, उत्तर प्रदेश (एनसीआर) में 230 और राजस्थान के एनसीआर जिलों में 160 निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया गया।

आयोग का मानना है कि इस कदम से धूल नियंत्रण नियमों का पालन बेहतर होगा, उल्लंघन पर प्रभावी रोक लगेगी और एनसीआर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी