वन्यजीव संरक्षण के लिए समाधान आधारित नीतिगत हस्तक्षेप जरूरीः भूपेन्द्र यादव

 


नई दिल्ली, 09 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए तकनीकी और सामाजिक अध्ययन तथा पारंपरिक ज्ञान के उपयोग के साथ समाधान आधारित नीतिगत हस्तक्षेप जरूरी है।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 91वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण भारत के पर्यावरणीय शासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वन्यजीव क्षेत्रों में और उनके आसपास विकास परियोजनाओं के निर्णय लेते समय वैज्ञानिक योजना, आवास संपर्क और प्रभावी शमन उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इस बैठक में कई महत्वपूर्ण संरक्षण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो (एक सींग वाले गैंडे) के लिए राइनो डीएनए इंडेक्सिंग सिस्टम आधारित दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के संरक्षण की भविष्य की रणनीति और पिग्मी हॉग को प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम में शामिल करने जैसे विषय प्रमुख रहे। इसके साथ इस बैठक में देशभर की 100 से अधिक विकास परियोजनाओं पर विचार किया गया।

बैठक में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड और उसकी स्थायी समिति की पिछली बैठकों में लिए गए निर्णयों की प्रगति की समीक्षा की गई। इनमें सड़क और पुल निर्माण, रक्षा अवसंरचना, पेयजल आपूर्ति, संचार टावर, बिजली ट्रांसमिशन लाइन, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, पाइपलाइन, खनन, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं, शैक्षणिक संस्थान और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल थीं। इन परियोजनाओं का मूल्यांकन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत आवश्यक वन्यजीव स्वीकृति के लिए किया गया।

समिति ने संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण कार्यक्रमों की प्रगति की भी समीक्षा की और गैंडा, स्लॉथ बियर तथा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड से संबंधित महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रकाशनों का विमोचन किया। इसके साथ समिति ने परियोजनाओं के पारिस्थितिक प्रभाव, जनहित और राष्ट्रीय विकास में उनके महत्व तथा वन्यजीवों और उनके आवासों पर प्रभाव कम करने के लिए प्रस्तावित उपायों की समीक्षा की।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी