होर्मुज स्ट्रेट में रुकावटों से गंभीर आर्थिक और ऊर्जा अस्थिरता पैदा हुई : नौसेना प्रमुख
- समुद्री डकैतों तक आधुनिक तकनीक पहुंचने से नार्को तस्करी जैसे खतरे ज्यादा मुश्किल हुए
नई दिल्ली, 02 अप्रैल (हि.स.)। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर चिंता जताते हुए माना है कि होर्मुज स्ट्रेट में रुकावटों से गंभीर आर्थिक और ऊर्जा अस्थिरता पैदा हुई है। साथ ही समुद्र में अब सिर्फ तेल और एनर्जी तक ही प्रतिस्पर्धा सीमित नहीं रही, बल्कि अब उन संसाधनों की ओर बढ़ रही है, जो भविष्य की ग्रोथ को आकार देगी। उन्होंने कहा कि समुद्री डकैतों तक आधुनिक तकनीक बिना रोक-टोक पहुंचने से नार्को तस्करी जैसे खतरे भी ज्यादा मुश्किल हो गए हैं।
मुंबई में आईओएस सागर के दूसरे एडिशन के फ्लैग ऑफ सेरेमनी में एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग तरह की 3,700 से ज्यादा समुद्री घटनाएं हुईं हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र में 2025 के दौरान एक बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा कीमत के मादक पदार्थों की जब्ती हुई है। इतने मुश्किल समुद्री माहौल में बहुत ज्यादा मुकाबला करने की बात कही गई है। आईओएस सागर के जरिए एक जैसे मकसद और मिलकर काम करने के लिए 16 एक जैसी सोच वाले समुद्री देशों का एक साथ आना बहुत कम और अहम है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष पांचवें हफ्ते में है। समुद्री जलमार्ग होर्मुज में रुकावटों से इस इलाके में गंभीर आर्थिक स्थितियां और ऊर्जा अस्थिरता हुई है। साथ ही समुद्र में प्रतिस्पर्धा अब सिर्फ तेल और ऊर्जा तक ही सीमित नहीं रही है। यह अब उन संसाधनों की ओर बढ़ रहा है, जो भविष्य की ग्रोथ को आकार देंगे, जैसे रेयर अर्थ एलिमेंट्स, ज़रूरी मिनरल्स, मछली पकड़ने के नए मैदान और यहां तक कि डेटा भी। नतीजतन समुद्री सर्वेक्षण, गहरे समुद्र में अनुसंधान गतिविधि और अवैध, अप्रतिबंधित और अनियमित मछली पकड़ने में काफी बढ़ोतरी हुई है, जो अक्सर समुद्र के किनारे बसे देशों के अधिकारों का अतिक्रमण करती है और निगरानी और प्रवर्तन में कमियों का फायदा उठाती है।
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि आईओएस सागर जैसी पहल समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए समुद्री देशों को एक साथ लाएगी, जो न सिर्फ हिंद महासागर क्षेत्र के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की समुद्री समुदाय के लिए मजबूत मिसाल है। आईओएस सागर अगले 50 दिनों में दक्षिण पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र से गुजरेगा और इसमें शामिल देशों के बीच रिश्ते मजबूत होंगे। उन्होंने अपने साझेदार देशों के मजबूत सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि इन देशों ने न सिर्फ इस कोशिश में अपना भरोसा दिखाया है, बल्कि पिछले संस्करण से भी ज्यादा भागीदारी के साथ आगे आए हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम