उज्जैनः नागपंचमी पर 24 घंटे के लिए खुलेगा नागचंद्रेश्वर मंदिर, साल में सिर्फ एक बार दर्शन

 


- सावन सोमवार के साथ बना अद्भुत संयोग, शीघ्र दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग शुरू

उज्जैन, 13 अगस्त (हि.स.)। इस साल नागपंचमी का पर्व 17 अगस्त को मनाय जाएगा। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष पर स्थित भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के पट पूरे एक साल बाद खोले जाएंगे। इस बार का संयोग बेहद अद्भुत है, क्योंकि नागपंचमी के दिन ही सावन का तीसरा सोमवार भी है।

श्रद्धालुओं को एक ही दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के साथ-साथ बाबा महाकाल की दिव्य सवारी का पुण्य लाभ भी मिलेगा। इस दुर्लभ संयोग के चलते धार्मिक नगरी उज्जैन में लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने का अनुमान है। प्रशासन और मंदिर समिति ने आस्था के इस महाकुंभ को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की है।

दरअसल, महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल मे सिर्फ एक बार नागपंचमी के अवसर पर 24 घंटे के खुलते हैं। इस बार सावन का तीसरा सोमवार और नागपंचमी एक साथ मनाई जाएगी। इस दौरान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट 16 अगस्त रात 12 बजे से 17 अगस्त की रात 12 बजे तक खुले रहेंगे।

इसी दिन भगवान महाकाल की सवारी भी निकलेगी। इस संयोग के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। गुरुवार से नागचंद्रेश्वर मंदिर में शीघ्र दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग शुरू हो गई है।

श्रद्धालु 300 रुपये शुल्क जमा कर नागचंद्रेश्वर मंदिर में शीघ्र दर्शन के लिए बुकिंग करा सकते हैं। इसके लिए श्रद्धालु महाकाल मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर मोबाइल नंबर डालकर पहले पासवर्ड बनाएंगे। इसके बाद रात 12 बजे से अगले 24 घंटे के लिए 11 अलग-अलग स्लॉट दिखाई देंगे। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार स्लॉट चुनकर शीघ्र दर्शन की बुकिंग करा सकेंगे। बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होगी।

महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष पलवाडिया ने बताया कि शीघ्र दर्शन टिकट का प्रिंट आउट साथ लाना अनिवार्य है। शीघ्र दर्शन के लिए हरसिद्धि पाल से बड़ा गणेश गली होते हुए गेट नंबर-5 से प्रवेश निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में मोबाइल फोन प्रतिबंधित रहेंगे। श्रद्धालुओं को निर्धारित समय और प्रवेश द्वार का पालन करने के लिए कहा गया है। टिकट केवल आधिकारिक वेबसाइट से बुक करने और किसी अनधिकृत व्यक्ति से संपर्क न करने की अपील की गई है।

भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के पट 16 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे से 17 अगस्त की रात 12 बजे तक यानी पूरे 24 घंटे के लिए खुले रहेंगे। इससे पहले 16 अगस्त की रात 11:30 बजे से 12:00 बजे के बीच महंत पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा द्वारा पट खुलने के साथ ही मुख्य पूजन होगा। अगले दिन 17 अगस्त दोपहर 12 बजे शासकीय पूजन होगा, जिसके बाद शाम की आरती के समय मंदिर के पुजारी और पुरोहित विधि-विधान से अर्चन करेंगे।

श्रद्धालुओं के लिए चाक-चौबंद इंतजाम लाखों की संख्या में आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए शहर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। बाहर से आने वाले वाहनों के लिए हरिफाटक पुल के पास मेघदूत पार्किंग, कर्कराज महादेव मंदिर के समीप, कार्तिक मेला ग्राउंड और बड़नगर रोड (धन उपार्जन केंद्र) को प्रमुख पार्किंग स्थल बनाया गया है।

भक्तों को महाप्रसाद के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए हरसिद्धि पाल, भील समाज धर्मशाला और कर्कराज पार्किंग पर अस्थायी लड्डू प्रसाद काउंटर और जूता स्टैंड बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए परिसर और मुख्य मार्गों पर डॉक्टरों की टीम तैनात रहेगी। कर्कराज, बड़ा गणेश और त्रिवेणी सरफेस पार्किंग जैसे प्रमुख पॉइंट पर चौबीसों घंटे एंबुलेंस उपलब्ध रहेगी।

उल्लेखनीय है कि नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी सर्प शय्या पर विराजमान हैं। यह मूर्ति दुनिया में अपने आप में अनोखी है। इस मंदिर में शिवलिंग पर चंद्रमा और नाग की विशेष प्रतिमा विराजमान है, इसलिए इसे नागचंद्रेश्वर कहा जाता है। यहाँ भगवान शिव की मूर्ति पर नाग और चंद्रमा का अद्भुत संयोजन दिखता है। दिलचस्प बात यह है कि महाकालेश्वर मंदिर के तीसरे तल पर स्थित यह मंदिर आम दिनों में दर्शन के लिए उपलब्ध नहीं रहता। यह मंदिर केवल नाग पंचमी के दिन खुलता है, बाकी पूरे वर्ष बंद रहता है।

परमार राजा भोज ने 1050 ईस्वी के करीब इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इसके बाद सिंधिया परिवार के महाराज राणोजी सिंधिया ने 1732 में महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। यहाँ 11वीं शताब्दी की एक दुर्लभ मूर्ति है। मान्यता है कि इस मंदिर के दर्शन से सर्प दोष, कालसर्प योग आदि से मुक्ति मिलती है।

नागपंचमी पर नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की जाती है, जिसका मतलब होता है, तीन अलग-अलग समय पर अलग अलग पूजा। सबसे पहली पूजा मध्यरात्रि में महानिर्वाणी संतों द्वारा होती है, दूसरी पूजा नागपंचमी के दिन दोपहर में सरकार द्वारा की जाती है और तीसरी पूजा नागपंचमी की शाम को भगवान महाकाल की पूजा के बाद मंदिर समिति करती है। इसके बाद रात बारह बजे फिर से एक वर्ष के लिए कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर