मप्र के उज्जैन में पहली बार महाकाल महोत्सव का आयोजन, मुख्यमंत्री बुधवार को करेंगे शुभारंभ
- महाकाल महालोक में आयोजित पांच दिवसीय महोत्सव के पहले दिन शंकर महादेवन अपने बेटों के साथ देंगे प्रस्तुति
भोपाल, 13 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में पहली बार महाकाल महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को महोत्सव का शुभारंभ करेंगे।
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर भारतीय संस्कृति, कला और अटूट श्रद्धा के महोत्सव की साक्षी बनने जा रही है। यहां पहली बार श्री महाकल महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री 14 जनवरी को शाम 7 बजे श्री महाकाल महालोक में इस पांच दिवसीय 'महोत्सव' का शुभारंभ करेंगे।
मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने मंगलवार को बताया कि महोत्सव की मुख्य सभाओं में देश के ख्यातिलब्ध कलाकार भगवान शिव की आराधना अपनी स्वर-लहरियों से करेंगे। इनमें 14 जनवरी को महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक शंकर महादेवन अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ 'शिवोऽहम्' की संगीतमय प्रस्तुति देंगे। महाकाल की नगरी में संगीत, नृत्य, नाट्य और लोक परंपराओं का यह समागम देश-दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर उज्जैन को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
उन्होंने बताया कि उज्जयिनी, जहाँ काल स्वयं नतमस्तक होता है और आस्था अनादि से अनंत की ओर प्रवाहित होती है, उसी पावन नगरी में भारतवर्ष का स्वाभिमान पर्व अंतर्गत 14 से 18 जनवरी 2026 तक आयोजित होने जा रहा श्रीमहाकाल महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतवर्ष का स्वाभिमान पर्व है। यह महोत्सव शिव की चेतना, लोक की परंपरा और वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। इस अवसर पर श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की पुनर्संयोजित वेबसाइट का लोकार्पण एवं महाकाल सृष्टि का समय यूट्यूब सीरीज का शुभारंभ भी किया जाएगा।
तिवारी ने बताया कि इस महोत्सव की विशेषता यह है कि इसमें शास्त्रीय और लोक, परंपरा और आधुनिकता, देशज और वैश्विक सभी धाराएँ एक साथ प्रवाहित होंगी। सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक शंकर महादेवन, सिद्धार्थ व शिवम् की त्रयी जब शिव-भक्ति और भारतीय संगीत की ऊँचाइयों को स्वर देगी, तब वह क्षण केवल श्रवण का नहीं, साधना का होगा। सोना महापात्रा की ओजस्वी और भावपूर्ण प्रस्तुति, द ग्रेट इंडियन कायर, विपिन अनेजा और श्रेयस शुक्ला जैसे कलाकारों की सहभागिता इस मंच को समकालीन सृजन का सशक्त स्वर प्रदान करेगी।
उन्होंने बताया कि महोत्सव का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयाम है-जनजातीय लोक कला। प्रतिदिन उज्जैन के विभिन्न स्थलों से निकलने वाली कला यात्राएँ, जनजातीय संस्कृति की जीवंतता, रंगों, वाद्यों और नृत्य की लय के साथ श्रीमहाकाल महालोक परिसर तक पहुँचेंगी। यह यात्रा केवल मार्ग की नहीं होगी, बल्कि पीढ़ियों से संचित परंपराओं की चेतना को वर्तमान से जोड़ने का माध्यम बनेगी। जनजातीय कलाकारों की प्रस्तुतियां इस आयोजन का हृदय होंगी, जो लोक की जड़ों से जुड़ी भारत की सांस्कृतिक शक्ति को अभिव्यक्त करेंगी। इस महोत्सव की एक ऐतिहासिक विशेषता यह भी है कि इंडोनेशिया और श्रीलंका के नाट्य दलों की सहभागिता के माध्यम से भारत की प्राचीन सांस्कृतिक कड़ियों का पुनर्स्मरण होगा। यह सहभागिता सिद्ध करेगी कि कि भारत की सभ्यता केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने वैश्विक भूभाग में सांस्कृतिक सेतु निर्मित किए हैं।
तिवारी ने बताया कि श्रीमहाकाल महोत्सव अपने स्वरूप में देश में पहली बार आयोजित हो रहा ऐसा आयोजन है, जहाँ आध्यात्म, लोक और वैश्विक संस्कृति एक साथ मंच साझा करेंगे। यह महोत्सव उज्जैन को केवल एक धार्मिक तीर्थ के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित करेगा। निश्चय ही यह आयोजन देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव में देश के विभिन्न भागों में स्थित ज्योतिर्लिंगों के महात्म्य, महिमा और देवलोक के प्रभाव से उद्भुत सांस्कृतिक रूपों को संवाद और कलारूपों के माध्यम से प्रदर्शित करने का सुनिश्चय किया गया है।
यह महोत्सव वीर भारत न्यास, श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संस्कृति संचालनालय, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, त्रिवेणी संग्रहालय, कृषि उद्योग विकास परिषद्, उज्जैन विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन एवं नगर निगम उज्जैन की सहभागिता में आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज सहित जन-प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
सुरों की सरिता : दिग्गज कलाकार देंगे प्रस्तुतियां
महोत्सव की मुख्य सभाओं में देश के ख्यातिलब्ध कलाकार भगवान शिव की आराधना अपनी स्वर-लहरियों से करेंगे।
- 14 जनवरीः सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक शंकर महादेवन अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ 'शिवोऽहम्' की संगीतमय प्रस्तुति देंगे।
- 15 जनवरी: मुम्बई का प्रसिद्ध 'द ग्रेट इंडियन क्वायर' 'शिवा' थीम पर प्रस्तुति देगा।
- 16 जनवरी: सुप्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा अपनी संगीत यात्रा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी।
- 17 जनवरी: इंदौर के श्रेयश शुक्ला एवं मुम्बई के विपिन अनेजा व उनके बैंड द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति होगी।
- 18 जनवरी: महोत्सव का समापन इंडोनेशिया (कोकोरदा पुत्रा) और श्रीलंका (अरियारन्ने कालूराच्ची) के दलों द्वारा प्रस्तुत 'शिव केंद्रित नृत्य नाटिका' से होगा।
बौद्धिक विमर्श: 'शिव तत्व और महाकाल'
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ 15 जनवरी को प्रातः 10:30 बजे एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसका विषय 'शिव तत्त्व और महाकाल: पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में' रखा गया है, जहां विद्वान शिव तत्व की दार्शनिक गहराइयों पर प्रकाश डालेंगे। इस संगोष्ठी में दस से अधिक देशों और भारत के बारह से अधिक राज्यों के विद्वान विषय के विविध पक्षों पर प्रकाश डालेंगे। इन देशों में मॉरीशस, नीदरलैंड, फीजी, यूएसए, यूके, आयरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, थाईलैंड, श्रीलंका और नेपाल आदि सम्मिलित हैं। संगोष्ठी में भारत के राज्यों उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, केरल, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश आदि के विशेषज्ञ विद्वान सम्मिलित होंगे।_____________________
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर