मध्य प्रदेश ने राज्यों की स्टार्ट-अप इको सिस्टम रैंकिंग में लीडर श्रेणी में स्थान रखा बरकरार
भोपाल, 16 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्टार्ट-अप दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय समारोह में मध्य प्रदेश को राज्य में सशक्त स्टार्ट-अप इको सिस्टम विकसित करने के लिए लीडर श्रेणी में मान्यता प्रदान की गई। मध्य प्रदेश ने इस प्रतिष्ठित रैंकिंग में अपना लीडर स्थान बरकरार रखते हुए निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्य आतिथ्य में राज्यों की स्टार्ट-अप इको सिस्टम रैंकिंग के पांचवां संस्करण का शुक्रवार देर शाम नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर के राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के स्टार्ट-अप इको सिस्टम के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्टार्ट-अप इंडिया की पिछले 10 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत आज दुनिया का थर्ड लार्जेस्ट स्टार्ट-अप इको सिस्टम है। दस साल पहले देश में 500 से भी कम स्टार्ट-अप थे, आज यह संख्या बढ़कर 2 लाख से ज्यादा है। वर्ष 2014 में भारत में सिर्फ 4 यूनिकॉर्न से आज भारत में करीब सवा सौ एक्टिव यूनिकॉर्न हैं। उन्होंने इस तथ्य की सराहना की कि भारत के युवाओं का फोकस रियल प्रोब्लम्स' साल्व करने पर है।
इस राष्ट्रीय समारोह में मध्य प्रदेश को राज्य में सशक्त स्टार्ट-अप इको सिस्टम विकसित करने के लिए लीडर श्रेणी में मान्यता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश ने इस प्रतिष्ठित रैंकिंग में अपनी लीडरशिप बरकरार रखते हुए निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सशक्त नेतृत्व और दूरदर्शी विज़न तथा मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश ने उद्यमिता को आर्थिक विकास के प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित किया है। स्टार्ट-अप को नीति-स्तरीय सहयोग, वित्तीय सहायता, नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली संरचना और जिला स्तर तक पहुँच सुनिश्चित करने की उनकी सोच ने राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाने में उत्प्रेरक भूमिका निभाई है। समारोह में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग की अपर सचिव रुही खान तथा मध्य प्रदेश स्टार्ट-अप सेंटर की कार्यकारी प्रमुख डॉ. अभा ऋषि द्वारा किया गया।
जनसम्पर्क अधिकारी राजेश बैन ने बताया कि विगत 10 वर्षों में मध्य प्रदेश एक अग्रणी स्टार्ट-अप डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है। वर्ष 2016 में मध्य प्रदेश में डीपीआईआईटी से मान्यता प्राप्त मात्र 7 स्टार्ट-अप से बढ़कर वर्तमान में राज्य के सभी जिलों में कुल 6,600 से अधिक स्टार्ट-अप सक्रिय हैं। विशेष रूप से इन स्टार्ट-अप में से 48% में कम-से-कम एक महिला संस्थापक हैं, जो समावेशी और समान उद्यमिता के प्रति राज्य की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह उल्लेखनीय प्रगति सशक्त नीतिगत ढांचे और संस्थागत सहयोग का परिणाम है, जिसका आधार मध्य प्रदेश स्टार्ट-अप नीति एवं क्रियान्वयन योजना 2025 है, जिसे ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लॉन्च किया गया। यह नीति स्टार्ट-अप के प्रत्येक चरण में समग्र सहयोग प्रदान करती है जिसमें एंटरप्रेन्योर-इन-रेजिडेंस सहायता, विचार स्तर पर सीड फंडिंग, तथा विकास-चरण के उद्यमों के लिए समर्पित स्टार्ट-अप कैपिटल फंड शामिल है।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश ने स्टार्ट-अप की संख्या, क्षमता निर्माण, निवेश सुविधा, नवाचार समर्थन और समावेशिता जैसे प्रमुख मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह सिद्ध किया है कि राज्य का स्टार्ट-अप इको सिस्टम न केवल विकसित हो रहा है, बल्कि निरंतर मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर