मप्रः आदिवासियों के मकान तोड़ने पर भड़के शिवराज सिंह, बोले- अन्याय की हद हो गई

 




- सीहोर जिले के ग्राम कोसमी में आदिसवारी परिवारों के 12 घर ढहाए, फसल कुचल दी गई

सीहोर, 11 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और फसलों को नुकसान पहुंचाने की कार्रवाई पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कड़ी नाराजगी जताई है। रविवार देर शाम प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे केन्द्रीय चौहान ने कहा कि उनके क्षेत्र में अन्याय की सारी सीमाएं पार हो गई हैं।

उन्होंने अधिकारियों से पीड़ित परिवारों के लिए नए मकान बनवाने और स्थायी इंतजाम होने तक उनके रहने तथा खाने की व्यवस्था करने को कहा। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने मामला रखने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात की मांग की।

दरअसल, रविवार दोपहर करीब दो बजे वन विकास निगम ने कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के 12 मकानों को तोड़ दिया। इस कार्रवाई में खेतों की फसलें भी कुचल दी गईं। घटना के बाद प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान के सामने महिलाएं अपनी व्यथा बताते हुए रो पड़ीं। केंद्रीय मंत्री चौहान ने धरना स्थल पर बैठकर उनकी बातें सुनीं और मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया।

शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से फोन पर बात कर प्रभावित परिवारों के लिए आवास उपलब्ध कराने और तब तक उनके भोजन तथा रहने का प्रबंध करने को कहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष भी रखा जाएगा। चौहान ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत बताई, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

पीड़ितों की स्थिति पर दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि जिन घरों में सुबह तक बच्चों की हंसी सुनाई देती थी, वहां अब उनकी चीखें गूंज रही हैं। महिलाएं रो-रोकर अपनी पीड़ा व्यक्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के पुराने मकान गिरा दिए गए, फसलें नष्ट कर दी गईं और कुओं तक को भर दिया गया। इससे परिवारों की वर्षों की मेहनत पर पानी फिर गया।

वरिष्ठ अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर जताई नाराजगी

केंद्रीय मंत्री चौहान ने आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने की कार्रवाई को शर्मनाक बताते हुए इसे अंजाम देने वालों की संवेदनहीनता पर सवाल उठाए। मौके पर वन विकास निगम और प्रशासन के किसी वरिष्ठ अधिकारी के उपस्थित नहीं रहने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को फोन कर घटनाक्रम की जानकारी दी।

एक साल पहले भी उठाया था मामला

कोसमी गांव विदिशा संसदीय क्षेत्र और बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आता है। करीब एक साल पहले शिवराज सिंह चौहान ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से चर्चा कर आदिवासी परिवारों के मकान नहीं तोड़ने के निर्देश दिए थे। उनकी शिकायत के बाद सीहोर के तत्कालीन डीएफओ मगन सिंह डाबर को पद से हटाया गया था। इसके बावजूद रविवार को वन विकास निगम की ओर से मकान तोड़ने की कार्रवाई की गई।

बरेला समुदाय के परिवारों के सामने रहने का संकट

कोसमी गांव में बरेला समुदाय के कई परिवार लंबे समय से रह रहे हैं। मकानों के ढहाए जाने और फसलें नष्ट होने के बाद उनके सामने आवास के साथ-साथ आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया है। प्रभावित परिवारों से चर्चा के दौरान चौहान ने कहा कि गरीबों को बेघर करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करने की बात कही।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर