51 शक्तिपीठों के शक्ति धाम प्रकल्प से देश में आध्यात्मिक चेतना का होगा विस्तार: नरेन्द्र सिंह तोमर
- उज्जैन के बालमुकुंद आश्रम में 51 शक्तिपीठों पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय संपन्न
भोपाल, 09 अक्टूबर (हि.स.)। देवी के प्रमुख 51 शक्तिपीठों पर आधारित शक्ति धाम प्रकल्प भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने की व्यापक परिकल्पना है। यह प्रकल्प देशभर के लोगों को प्रेरणा देने के साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए ज्ञान को साधना में ढालना और आध्यात्मिक ऊर्जा को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है।
उक्त विचार मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को उज्जैन के झालरिया मठ स्थित श्री बालमुकुंद आश्रम में 51 शक्तिपीठों पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर व्यक्त किए। शक्ति धाम न्यास, संस्कृति विभाग तथा कालिदास संस्कृत अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में यह राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई थी।
विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने संगोष्ठी के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नवरात्रि के प्रारंभ होने से पहले मां भगवती का स्मरण करते हुए देवी के 51 शक्तिपीठों की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में विचार-विमर्श करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। शक्ति की आराधना, श्रद्धापूव्रक स्मरण और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं का अध्ययन हमारे जीवन को सार्थक, प्रेरणास्पद और सुगम बनाता है।
उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नही है, बल्कि उस ज्ञान को साधना और व्यवहार में उतारकर अपने जीवन, देश की प्रगति तथा समाज के कल्याण के लिए उपयोग करना आवश्यक है। 51 शक्तिपीठों की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए सभी प्रयासरत हैं। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से इस विषय से जुड़े गूढ़ रहस्यों और आध्यात्मिक पहलुओं को समझने का अवसर मिला है। यह पहल स्वागत योग्य है। जब यह प्रकल्प साकार होगा, तब देशभर के श्रद्धालुओं को प्रेरणा मिलेगी। विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सामूहिक प्रयासों से इस महत्वपूर्ण प्रकल्प को पूर्णता प्रदान की जाएगी।
समापन कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक बटुकों द्वारा स्वस्तिवाचन के साथ हुआ। अतिथियों का परिचय कालिदास संस्कृत अकादमी के निदेशक गोविंद गंधे ने दिया। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रतिवेदन शक्ति धाम न्यास के सचिव राकेश शर्मा ने प्रस्तुत किया।
आध्यात्मिकता और धार्मिक संस्कारों से सशक्त होगा राष्ट्र: उपमुख्यमंत्री शुक्ल
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी आध्यात्मिक परंपरा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत में निहित है। देश में आध्यात्मिकता का विकास आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढिय़ों में धार्मिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और सेवा के संस्कारों का विकास हो सके। इन संस्कारों से प्रेरित होकर युवा पीढ़ी पीडि़त मानवता की सेवा में अपना योगदान दे सकेगी।
उन्होंने कहा कि धर्म और आध्यात्म के क्षेत्र में भारत की विशिष्ट पहचान है। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रति विश्वभर में सम्मान का भाव है। धार्मिक परंपराएं समाज को नैतिक मूल्यों, सदाचार और मानव कल्याण की प्रेरणा देती है।
शुक्ल ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां-जहां माता सती के शरीर के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। नर्मदा नदी के किनारे देवी के 51 शक्तिपीठों को एक साथ स्थापित करने की परिकल्पना साकार होने से श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर सभी शक्तिपीठों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो सकेगा। इससे देश में धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक चेतना को नई मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इस प्रकल्प के अंतर्गत भव्य भवन का निर्माण और संकल्प की पूर्णता हम सभी का सामूहिक दायित्व है। इस पुनीत कार्य में योगदान देने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात होगी। शक्ति धाम प्रकल्प विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने तथा भारत को सनातन धर्म और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाने में योगदान देगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर