मप्रः सिंधिया राज परिवार की संपत्ति का समझौता फिर कानूनी अड़चनों में फंसा
- ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ की बेटी ने लगाया सहमति के बिना हस्ताक्षर कराने का आरोप
ग्वालियर, 07 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सिंधिया राज परिवार की अरबों की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) एक बार फिर कानूनी अड़चनों में फंस गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे सिंधिया की बेटी प्रतिमा देवी ने इसमें आपत्ति दर्ज कराई है।
ग्वालियर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय में बुधवार को इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद में समझौते पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के वकीलों के बीच बहस पूरी होने के बाद न्यायालय ने फैसला सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की है। न्यायालय यह तय करेगा कि मामले में साक्ष्य के बाद फैसला दिया जाए या अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई के आधार पर ही निर्णय किया जाए।
बुधवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना (जो कि नेपाल के राणा परिवार में विवाहित हैं) की ओर से दाखिल आपत्ति आवेदन पर बहस हुई। प्रतिमा देवी का कहना है कि उनसे धोखाधड़ी कर समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब उनकी तीनों मौसियों राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे ने न्यायालय में दिया है। उनका कहना है कि समझौते पर सभी की सहमति से हस्ताक्षर हुए थे। हस्ताक्षर के बाद सभी लोग वहां रुके, डिनर किया और अंत में फोटोग्राफ भी लिए गए। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मामले में साक्ष्य कराने की जरूरत नहीं है। दस्तावेज पर हस्ताक्षर सहमति से ही किए गए हैं।
गौरतलब है कि वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था। लंबे कानूनी विवाद के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से राजीनामा तैयार कर न्यायालय में पेश किया था। मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार बनाया गया था। हालांकि, पूर्व में सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होने के कारण अदालत ने उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।
अब प्रतिमा देवी ने न्यायालय में आवेदन देकर मामले की कार्यवाही में दोबारा शामिल होने और समझौते में अपना हक देने की मांग की है। उन्होंने मौजूदा समझौता प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई है। पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनकी बेटियों को समझौते से बाहर रखे जाने के कारण राजीनामा कानूनी रूप से पेचीदा हो गया है।
सिंधिया राजपरिवार की 41 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति के बंटवारे को लेकर है विवाद
ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियों के बंटवारे को लेकर ग्वालियर जिला न्यायालय में विवाद चल रहा है। इन संपत्तियों में जयविलास पैलेस (मुख्य परिसर, बंगला, कार्यालय, निशात कोठी, कमला भवन, गजरा भवन), सख्या विलास, सुसेरा कोठी, कुलेथ कोठी, टेकनपुर रिट्रीट, शिवपुरी का माधव विलास पैलेस (जॉर्ज कैसल, हैप्पी विला), उज्जैन का कालियादेह पैलेस और गुना कोठी शामिल हैं। इसके अलावा मुंबई का 'समुद्र महल' (वर्ली), 'उषाकिरण' (कारमाइकल रोड), दादर में दुकान व आवास, दिल्ली की ग्वालियर हाउस कोठी (राजपुर रोड), आगरा कोठी, झांसी की पाडोन कोठी, वाराणसी का सिंधिया घाट, ऊटी में बैलफोर लॉज समेत 5 बंगले और पुणे का पद्माविलास, ग्वालियर का छतरी परिसर, लश्कर के विट्ठल और कोटेश्वर मंदिर, शिवपुरी की माधवराव और जीजा महाराज छतरी, उज्जैन का द्वारकाधीश संस्थान, काशी (गंगा महल), मथुरा, वृंदावन, अयोध्या और पुष्कर के मंदिर आदि।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर