देवी-देवताओं के नाम से दुकाने चलाते हैं तो सनातन अपनाने में झिझक क्यों : साध्वी सरस्वती
- हिंदू सम्मेलन में उठा घर वापसी का मुद्दा, साध्वी सरस्वती ने किया हर घर में एक तलवार रखने का आह्वान
राजगढ़, 01 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के माचलपुर में गुरुवार को आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में ‘घर वापसी’ का मुद्दा उठा। सम्मेलन में साध्वी सरस्वती दीदी ने इस्लाम से जुड़े लोगों द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं के नाम से दुकानें, होटल और ढाबे संचालित किए जाने पर सीधा और तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब महाकाल, मां दूर्गा और अन्य हिन्दू आराध्यों के नाम से रोजी-रोटी चलाई जा रही है, तो सनातन धर्म अपनाने में झिझक क्यों। साध्वी ने कहा कि अगर अपने ईमान के पक्के हो, तो घर वापसी करिए। सनातन में लौटने वालों का हम खुले मन से स्वागत करते हैं। उनके इस बयान पर सभा स्थल ‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंज उठा।
साध्वी सरस्वती दीदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हिन्दू समाज को अब आत्ममंथन नहीं, आत्मरक्षा और आत्मगौरव की आवश्यकता है। उन्होंने शस्त्र और शास्त्र - दोनों की दीक्षा को अनिवार्य बताते हुए कहा कि हर हिन्दू परिवार में संस्कार के साथ-साथ आत्मरक्षा का सामर्थ्य भी होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक हिन्दू घर में कम से कम एक तलवार रखने का आह्वान करते हुए कहा कि यह हिंसा नहीं, आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने स्वदेशी अपनाने, तिलक-शिखा धारण करने, अभिवादन में ‘राम-राम’ या ‘जय श्रीराम’ कहने और अपने धन के उपयोग में सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं को अब यह तय करना होगा कि उनका धन, श्रम और समर्थन किसके हाथों में जा रहा है।
भारत में रहना है, तो वंदे मातरम् कहना होगानववर्ष के संदर्भ में साध्वी सरस्वती ने स्पष्ट किया कि उनका नववर्ष 1 जनवरी नहीं, बल्कि चैत्र प्रतिपदा से प्रारंभ होता है। उन्होंने कहा कि हर हिन्दू को पांच संकल्प - स्वदेशी अपनाना, सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान, सामाजिक एकता, गोसेवा और पारिवारिक समरसता - लेकर लौटना चाहिए। जाति-पात से ऊपर उठकर एकजुट रहने का संदेश देते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि “हिन्दू बंटेगा तो कटेगा।”
साध्वी ने शिकारी और तोते की कहानी सुनाकर हिन्दू समाज को चेताया। उन्होंने कहा कि अब घुसपैठियों को शरण देने का समय समाप्त हो चुका है। पचास साल पहले किसी के साथ क्या हुआ, उससे आज के हिन्दू का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने सेक्युलरिज्म का पाठ पढ़ाने वालों को स्पष्ट शब्दों में जवाब देते हुए कहा कि यदि भारत में रहना है, तो वंदे मातरम् कहना होगा। यदि भारत में रहना है, तो भारत माता की जय बोलनी होगी।
शोभायात्रा से सम्मेलन की शुरुआतमाचलपुर में सम्मेलन की शुरुआत श्री चाठाकुण्डी बालाजी मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा से हुई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए दोपहर में रावणबल्डी मैदान पहुंची। शोभायात्रा में भगवा ध्वज, जयघोष और पारंपरिक वेशभूषा ने पूरे नगर को धर्ममय वातावरण में रंग दिया। धर्मसभा का शुभारंभ गणेश वंदना के साथ हुआ। मंच पर कबीर संत अरविन्ददास शास्त्री (मुंबई), महंत रामजीदास (मुंबई), मुनिशानंद महाराज, परमानंद महाराज, श्यामसुंदरदास महाराज, रूपनाथ जी महाराज और सत्यानंद जी त्यागी महाराज उपस्थित रहे। मुख्य वक्ताओं में धर्मजागरण के क्षेत्रीय संगठन मंत्री मनीष उपाध्याय और साध्वी सरस्वती दीदी शामिल रहीं।
कार्यक्रम के समापन पर सहभोज का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। माचलपुर का यह हिन्दू सम्मेलन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ‘घर वापसी’ और हिन्दू एकता के स्पष्ट संदेश के साथ हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना लिया।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर