(अपडेट) राहुल गांधी को बड़ी राहत, मप्र हाई कोर्ट ने दिए मानहानि मामले को समाप्त करने के निर्देश
जबलपुर, 25 जून (हि.स.)। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मानहानि मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले को समाप्त करने के निर्देश भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट को दिए हैं।
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान द्वारा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि मामले में गुरुवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में सुनवाई हुई। एक दिन पहले ही राहुल गांधी की तरफ से प्रकरण में अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए लिखित आवेदन पेश किया गया था, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने कन्फ्यूजन में कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम लिया था। इस पर न्यायालय ने कार्तिकेय सिंह चौहान का पक्ष जानने के लिए उन्हें जवाब दाखिल करने का अवसर दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के पुत्र कार्तिकेय सिंह ने उनके लिखित खेदनामा को स्वीकार करते हुए प्रकरण को समाप्त करने के लिए सहमति व्यक्त की। कार्तिकेय की ओर से कोर्ट में कहा गया कि अगर राहुल गांधी ने भूलवश उनका नाम लिया था और उस पर खेद जता दिया है, तो उन्हें अब इस पर कोई आपत्ति नहीं है। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे मानहानि मामले को निरस्त करने के आदेश जारी किए।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान राहुल गांधी पर भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का परिवाद दायर किया था। राहुल गांधी पर आरोप था कि 29 अक्टूबर 2018 में झाबुआ में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने पनामा पेपर्स लीक प्रकरण का उल्लेख करते हुए शिकायतकर्ता का नाम लिया था, जिससे उनकी और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
परिवाद पर सुनवाई करते हुए भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट ने राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी किए थे। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर राहत की मांग की थी। उच्च न्यायालय ने पूर्व में सुनवाई के दौरान अधीनस्थ न्यायालय का रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। मंगलवार को हुई सुनवाई में राहुल गांधी की ओर से एमपी-एमएलए कोर्ट का रिकॉर्ड उच्च न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
फिर, बुधवार, 25 जून को निर्धारित सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने के लिए आवेदन भी दाखिल किया गया था। इस आवेदन पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से प्रस्तुत आवेदन में कहा गया कि उनका बयान शिकायतकर्ता के संदर्भ में नहीं था। साथ ही बयान को लेकर खेद भी व्यक्त किया गया। आवेदन में कहा गया था कि तथाकथित पनामा पेपर्स मामले में गलती से शिकायतकर्ता का नाम ले लिया था। इसके लिए उन्होंने अगले दिन सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया था। उनका इरादा पनामा पेपर्स मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र के नाम का जिक्र करना था।
याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने भोपाल एमपी-एमएलए कोर्ट में लंबित मानहानि के प्रकरण को समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की। एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए उक्त आदेश जारी किए। शिकायतकर्ता की तरफ से अधिवक्ता संकल्प कोचर ने पैरवी की।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर