मप्र के पांढुर्णा में परम्परा के नाम पर फिर खूनी खेल, गोटमार मेले में अब तक 1185 घायल, गंभीर हालत में 7 नागपुर रेफर
- पांढुर्णा और सावरगांव के ग्रामीणों के बीच जमकर हुआ पथराव
छिंदवाड़ा, 11 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में एक बार फिर परम्परा के नाम खूनी खेल खेला गया। यहां शुक्रवार को पारंपरिक गोटमार मेले का आयोजन हुआ, जिसमें जाम नदी के दोनों किनारों पर बसे पांढुर्णा और सावरगांव के लोगों ने एक-दूसरे पर जमकर पथराव किया। इस भीषण पत्थरबाजी में शाम 6 बजे तक 1185 लोगों के घायल होने की सूचना है। इनमें से सात गंभीर घायलों को नागपुर रेफर किया गया है।
पांढुर्णा में गोटमार मेले की परंपरा करीब 300 साल पुरानी है। इसी परम्परा के मुताबिक, शुक्रवार को यहां सुबह 11 बजे पूजा-अर्चना के साथ गोटमार मेले की शुरुआत हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने चंडी माता मंदिर और जाम नदी में गाड़े गए पलाश के झंडे की पूजा की। जाम नदी में झंडा लगाए जाने के बाद पांढुर्णा और सावरगांव के गोटमार खिलाड़ी आमने-सामने आ गए और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।
शाम तक चले इस पारम्परिक खेल में 1185 लोग घायल हो चुके हैं। कई लोगों के सिर फूटे हैं और हड्डियां टूटी हैं। सावरगांव के 33 वर्षीय नितिन भादे का पैर टूट गया। 30 वर्षीय संजय धारपुरे के सिर और पैर में गंभीर चोट आई है। पांढुर्णा के सचिन हाटेकर का पैर टूट गया। प्रीतम योगेश राउत के सिर और सीने में चोट है। कैलाश नंदू साहू के सिर, कमर और पैर में चोट आई है। सभी सात गंभीर घायलों को नागपुर रेफर किया गया है।
पांढुर्णा से कांग्रेस विधायक निलेश उईके भी पत्थरबाजी करते नजर आए। वहीं, पांच साल के बच्चे योगेश मरावी का भी पत्थर लगने से सिर फूट गया। वह परिवार के साथ महाराष्ट्र के मोवाड से मेला देखने आया था। घायलों के इलाज के लिए मेला क्षेत्र में सात अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं जहां घायलों को उपचार दिया जा रहा है। गंभीर रूप से घायल लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने गंभीर मरीजों को तुरंत नागपुर जैसे बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने 44 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है और 22 एंबुलेंस तैनात की हैं।
सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। मेले के दौरान जिला कलेक्टर नीरज वशिष्ठ, पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी कैंपों पर नजर बनाए रखे। स्थिति पर नजर रखने के लिए 700 पुलिसकर्मी तैनात हैं। मेला क्षेत्र और आसपास 10 सीसीटीवी कैमरों और 3 ड्रोन से निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने चोटों की गंभीरता को कम करने के लिए गुलेल के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया, ताकि मेले में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
पांढुर्णा विधायक निलेश उईके ने कहा कि वे पिछले 10 साल से गोटमार खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोटमार मेले से लोगों की आस्था और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। खेल के दौरान लोग संयम बरतें। किसी को गंभीर चोट न पहुंचे, इसका भी ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि परंपरा और आस्था का सम्मान करते हुए गोटमार खेलें।
पांढुर्णा कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ ने बताया कि परंपरा के अनुसार खेले जाने वाला गोटमार मेले के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। घायल होने वाले लोगों के लिए 22 एंबुलेंस और 700 से ज्यादा पुलिसकर्मी अलग-अलग इलाकों में तैनात किए गए हैं। गोफन और धारदार हथियार पर पूरी तरीके से प्रतिबंध लगाया गया है। लोक परंपरा के अनुसार ही खेल खेलने की लोगों से अपील की गई है।
प्रेम कहानी से जुड़ी है मान्यता
स्थानीय लोक मान्यता के अनुसार गोटमार मेले की कहानी पांढुर्ना के युवक और सांवरगांव की युवती की प्रेम कहानी से जुड़ी है। बताया जाता है कि करीब 300 साल पहले दोनों सामाजिक बंदिशों के कारण घर से भागे थे और जाम नदी पार करते समय दोनों गांवों के लोगों के बीच पत्थरबाजी में उनकी मौत हो गई थी।
गोटमार मेले में जाम नदी के बीच पलाश का पेड़ और झंडा लगाया जाता है। दोनों पक्ष इसे हासिल करने के लिए मुकाबला करते हैं। जिस पक्ष का खिलाड़ी सबसे पहले पेड़ और झंडे तक पहुंचकर उसे हासिल करता है, उसे विजेता माना जाता है। इसी परंपरा के कारण मेले का स्वरूप बाकी आयोजनों से अलग नजर आता है। गोटमार मेले की यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि पत्थरबाजी के दौरान लोगों के घायल होने और मौतों की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। प्रशासन आयोजन के दौरान सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर नजर रखता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर