मप्र के ओंकारेश्वर में हुआ पांच दिवसीय एकात्म पर्व, शंकरदूत के रुप में दीक्षित हुए देश-विदेश के 700 युवा

 








- अद्वैत वेदांत दर्शन के सुदीर्घ प्रसार के लिए स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती और गौतम भाई पटेल सम्मानित

इंदौर, 21 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में आयोजित पांच दिवसीय शंकर प्रकटोत्सव एकात्म पर्व का मंगलवार को आदि शंकराचार्य की जयंती वैशाख शुक्ल पंचमी पर भव्य समापन हुआ। इससे पूर्व संतों की उपस्थिति में नर्मदा तट पर आयोजित दीक्षा समारोह में देश-विदेश के 700 से अधिक युवा ‘शंकरदूत’ के रूप में दीक्षित हुए।

आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग मप्र शासन द्वारा ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर स्थित एकात्म धाम में आयोजित एकात्म पर्व के समापन अवसर पर जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, चिन्मय मिशन के पूर्व वैश्विक प्रमुख स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती, मप्र के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, दक्षिणामूर्ति मठ के प्रमुख स्वामी पूर्णानंद गिरी, माँ पूर्ण प्रज्ञा, प्रख्यात शिक्षाविद् गौतम भाई पटेल, महंत मंगलदास त्यागी तथा वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम् के प्राचार्य ब्रह्मर्षि कुप्प शिव सुब्रमण्यम अवधानी की उपस्थिति रही।

अद्वैत के आलोक स्तंभों का सम्मान

एकात्म पर्व के समापन समारोह में शैक्षणिक जगत की दो प्रखर विभूतियों को सम्मानित किया गया। इनमें चिन्मय मिशन के पूर्व प्रमुख स्वामी तेजोमयानंद को उनकी अखंड अद्वैत निष्ठा के लिए सम्मानित किया गया। पद्मभूषण से विभूषित स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती ने 'उपनिषद गंगा' और विभिन्न ग्रंथों की व्याख्या के माध्यम से वेदांत को जन-जन तक पहुँचाया है। साथ ही प्रख्यात विद्वान प्रोफेसर गौतम भाई पटेल को संस्कृत वांग्मय और अद्वैत दर्शन में उनके अतुलनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। प्रो. पटेल ने आचार्य शंकर की संपूर्ण कृतियों का पहली बार गुजराती भाषा में अनुवाद करने का ऐतिहासिक संकल्प लिया है।

पंच दिवसीय एकात्म पर्व में वैदिक अनुष्ठान एवं श्रौत कर्मानुष्ठान के लिए हैदराबाद से पधारे ज्येष्ठ ब्रह्मश्री वेदमूर्ति कुप्पा रामगोपाल वाजपेय्या तथा उनकी धर्मपत्नी कुप्पा कल्पकाम्बा सोमपीठनी को श्रुति परम्परा एवं वैदिक अनुष्ठान के प्रति उनके अपार समर्पण के लिए कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए न्यास द्वारा उन्हें आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा, जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी द्वारा भेंट स्वरूप प्रदान की गई। यह दोनों शृङ्गेरी शंकराचार्य जगद्गुरु विधुशेखर भारती महास्वामी के पूर्वाश्रम के पितामह-पितामही हैं। इसी क्रम में पंचदिवसीय एकात्म पर्व के दौरान प्रतिदिन प्रायोगिक समाचार पत्र तैयार करने के लिए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के छात्रों को सम्मानित किया गया।

एकात्म पर्व के समापन से पहले ओंकारेश्वर में मां नर्मदा के तट पर भव्य दीक्षा समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि एवं अन्य संतों की उपस्थिति में देश-विदेश के 700 से अधिक युवा ‘शंकरदूत’ के रूप में दीक्षित हुए।

दरअसल, वेदांत दर्शन और आध्यात्मिक विरासत को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अभिनव पहल कर रही है। देश-विदेश के 18 से 32 आयु वर्ष के युवाओं एवं 32 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए 'अद्वैत वेदांत' के गहन अध्ययन और अनुभव हेतु न्यास द्वारा नियमित देश के विभिन्न आश्रमों एवं संस्थानों में प्रतिष्ठित आचार्यों के मार्गदर्शन में अद्वैत जागरण शिविर शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।

नेपाल, बांग्लादेश के युवा भी शंकरदूत के रूप में हुए दीक्षित

इन शिविरों में देश-विदेश के युवा एवं नागरिक बड़ी संख्या में सम्मिलित हो रहे है। वर्ष 2020 से शुरू हुए इन शिविरों में अभी तक स्पेन, इंडोनेशिया, नीदरलैंड, बांग्लादेश, टर्की, नेपाल, अमेरिका एवं भारत के 25 से अधिक राज्यों, केन्द्रशासित प्रदेशों के आईआईटीइन, प्रोफेसर्स, प्रोफेशनल्स, डॉक्टर्स, आर्टिस्ट, वैज्ञानिक, आर्मी ऑफिसर्स, प्रशासनिक अधिकारी, शोधार्थी सहित 1800 से अधिक युवा एवं जिज्ञासु सहभागिता कर चुके है। अभी तक कुल 45 नियमित शिविर तथा 03 एडवांस्ड शिविरों का आयोजन हो चुका है, जिसमें लगभग 1800 से अधिक शंकरदूत तैयार हुए हैं। पंचम दीक्षा समारोह में देश-विदेश से लगभग 700 शिविरार्थियों को शंकरदूत के रूप में दीक्षा दी गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर