डायबिटीज के खिलाफ जनआंदोलन की जरूरत: शिवराज सिंह चौहान

 




- रायसेन में आरएसएसडीआई एमपीकॉन सम्मेलन में शामिल हुए केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान

रायसेन, 03 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में इसके खिलाफ व्यापक जनजागरूकता और जनआंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है। डॉक्टर, सरकार और समाज मिलकर लोगों को डायबिटीज की रोकथाम, उपचार और सावधानियों के प्रति जागरूक करें।

केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान शनिवार देर शाम मध्य प्रदेश के रायसेन में रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया' (आरएसएसडीआई एमपीकॉन) के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि डायबिटीज के उपचार के साथ-साथ उसकी रोकथाम सबसे महत्वपूर्ण है। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक परिश्रम, योग, व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच से डायबिटीज तथा उससे होने वाली गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।

डायबिटीज की रोकथाम पर विशेष ध्यान जरूरी

केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि डायबिटीज का प्रभाव केवल ब्लड शुगर तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हृदय, किडनी, नसों और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। कई लोगों को लंबे समय तक अपनी डायबिटीज की जानकारी ही नहीं होती, जिसके कारण बीमारी बढ़ने के बाद जटिलताएं सामने आती हैं।

उन्होंने कहा कि प्रिवेंशन, अर्ली डिटेक्शन और समय पर उपचार के प्रति आमजन को जागरूक करना आवश्यक है। प्री-डायबिटीज की स्थिति में भी जीवनशैली में आवश्यक बदलाव और नियमित जांच महत्वपूर्ण है।

नए शोध और बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने का मंच

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि आरएसएसडीआई एमपीकॉन जैसे सम्मेलन चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नए शोध, उपचार की नई पद्धतियों और नवाचारों को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच हैं। विशेषज्ञों के बीच बेस्ट प्रैक्टिस का आदान-प्रदान होने से इसका लाभ आम मरीजों तक पहुंचाया जा सकता है।

डॉ. एच.एच. त्रिवेदी को बताया मानवता की मिसाल

चौहान ने वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एच.एच. त्रिवेदी के साथ अपने छात्र जीवन का एक संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि बचपन में बीमारी के दौरान वे हमीदिया अस्पताल में भर्ती हुए थे, जहां डॉ. त्रिवेदी ने उनका उपचार किया था। अस्पताल से छुट्टी के बाद जब वे दोबारा दिखाने के लिए डॉ. त्रिवेदी के घर पहुंचे और फीस के लिए 20 रुपये देने लगे, तो डॉक्टर ने फीस लेने से इनकार कर दिया।

चौहान ने कहा कि डॉ. त्रिवेदी ने उस समय कहा था कि “तुम सरकारी अस्पताल में भर्ती थे और मैंने तुम्हें देखा था। मैं कोई पैसा नहीं लूंगा। अगर मैं पैसा ले लूंगा तो संदेश यह जाएगा कि डॉक्टर त्रिवेदी घर में पैसा लेने के लिए अस्पताल से छुट्टी देते हैं।”

उन्होंने कहा कि यह घटना चिकित्सा सेवा में ईमानदारी, संवेदनशीलता और मानवता का उदाहरण है। डॉक्टर केवल उपचार करने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज में विश्वास और मानवता के महत्वपूर्ण आधार हैं।

चौहान ने चिकित्सकों को “स्वस्थ भारत के शिल्पी, सशक्त भारत के सारथी और मानवता का गौरव” बताते हुए आरएसएसडीआई एमपीकॉन के आयोजन के लिए बधाई दी और डायबिटीज के खिलाफ जागरूकता अभियान को जनआंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर