मप्र में जैन साध्वियों की मौत को लेकर आक्रोश, सड़कों पर उतरे समाज जन, जांच और सुरक्षा नीति की मांग
- संत सुरक्षा प्रोटोकॉल और संत सुरक्षा नीति लागू करने की उठाई मांग
भोपाल/रीवा, 25 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में 20 मई को पैदल विहार कर रही तीन जैन साध्वियों को कार से कुचलने की घटना के बाद देशभर के जैन समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस हादसे में आचार्य 108 विद्यासागर महाराज की शिष्या श्रुतमति माताजी और उपशममति माताजी की मृत्यु हो गई थी, जबकि एक अन्य आर्यिका माताजी गंभीर रूप से घायल हैं।
इस घटना के विरोध में सोमवार को मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में जैन समाज और सकल हिंदू संगठनों ने काली पट्टी बांधकर विशाल मौन जुलूस निकाले। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर समाज ने इस घटना को 'अहिंसा पर सीधा हमला' बताते हुए आरोपितों के खिलाफ हत्या (धारा 302) के तहत मुकदमा चलाने और देश में स्थायी संत सुरक्षा कानून लागू करने की पुरजोर मांग की है।
राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ और विभिन्न जैन संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन कर आक्रोश पत्र सौंपा। समाज ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो देशव्यापी उग्र आंदोलन, चक्का जाम और 'भारत बंद' जैसे कदम उठाए जाएंगे। इंदौर में जैन समाज के हजारों लोग पैदल मौन रैली निकालकर सीधे कलेक्टर ऑफिस पहुंचे। समाजजन इस बात पर अड़ गए कि विषय बेहद गंभीर है, इसलिए वे ज्ञापन केवल कलेक्टर को ही सौंपेंगे और आश्वासन मिलने तक वे कलेक्ट्रेट परिसर में ही शांतिपूर्ण ढंग से डटे रहे।
जबलपुर में कमानिया गेट से घंटाघर तक 'राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान' के बैनर तले विशाल मौन जुलूस निकाला गया। समाज ने साध्वियों की मौत पर न्याय के साथ-साथ हाल ही में ग्राम देवरान में हुई 11 जैन प्रतिमाओं की चोरी का खुलासा करने की भी मांग उठाई। गुना, सागर और विदिशा में हजारों की संख्या में युवा, महिलाएं और समाज के बुजुर्ग सड़कों पर उतरे। गुना में चौधरी मोहल्ला बड़ा मंदिर से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला गया, वहीं सागर में कटरा नमकमंडी से कोतवाली थाना तक मौन जुलूस निकाला गया।
अशोकनगर, खातेगांव और आष्टा में भी जैन समाज ने जैन समाज विरोध जताया। खातेगांव में श्री दिगंबर जैन मंदिर से एसडीएम कार्यालय तक रैली निकाली गई। आष्टा में सकल श्वेताम्बर, दिगंबर समाज और सकल हिंदू समाज संगठन के नेतृत्व में विशाल रैली निकालकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। बैतूल, इटारसी, रतलाम, नर्मदापुरम, मैहर, अमरपाटन और बड़ामलहरा (छतरपुर) में भी प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर इस पूरी घटना की सीबीआई या उच्चस्तरीय एसआईटी जांच कराने की मांग की गई।
गौरतलब है कि यह घटना रीवा कलेक्ट्रेट के सामने की है, जहां पैदल विहार कर रही साध्वियों को एक तेज रफ्तार कार ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी थी। इस घटना का जो सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, उसने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। वीडियो देखकर साफ लग रहा है कि कार जानबूझकर साध्वियों के ऊपर चढ़ाई गई थी। स्वयं सूबे के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा जैन धर्मशाला पहुंचकर समाज जनों से मुलाकात की और माना कि फुटेज देखने से यह सामान्य दुर्घटना नहीं लगती।
टक्कर मारने के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया था, जिसे करीब 270 किलोमीटर दूर बरगी पुलिस ने बहोरीपार टोल नाका के पास से घेराबंदी कर गिरफ्तार किया। आरोपी कार चालक का नाम रशीद आबाद अली शाह है, जो कि नागपुर (महाराष्ट्र) का रहने वाला है।
जैन समाज की प्रमुख मांगें
जैन समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि जैन साधु-संत पूरी तरह निहत्थे, अपरिग्रही और पैदल जीवन जीते हैं। वे किसी सुरक्षा या राजकीय वाहन का उपयोग नहीं करते, ऐसे में उनकी रक्षा करना शासन की नैतिक जिम्मेदारी है। समाज ने मुख्य रूप से अपनी मांगें शासन के समक्ष रखी हैं। जिसमें पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और सभी डिजिटल व सीसीटीवी साक्ष्यों को सुरक्षित किया जाए।
फरार आरोपित और उसके पीछे किसी भी संभावित साजिशकर्ता पर हत्या (पुराने कानून की धारा 302) के तहत कड़ी कार्रवाई हो। संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हो, जिसमें संतों के विहार मार्ग पर प्रशासनिक समन्वय, यातायात नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की पेट्रोलिंग और हाइवे पर विशेष चेतावनी संकेतक (साइन बोर्ड) लगाए जाएं। केंद्र सरकार संतों के खिलाफ होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखते हुए एक राष्ट्रीय कानून बनाए और इन मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में हो।
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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत