मप्र के इंदौर में बना 69वाँ ग्रीन कॉरिडोर, एक परिवार के संकल्प से तीन लोगों को मिली नई जिंदगी

 




इंदौर, 08 अगस्त (हि.स.)। अंगदान में देश में सबसे आगे रहने वाला मध्य प्रदेश का इंदौर 12 दिनों के अंतराल के बाद एक बार फिर जीवन बचाने की संवेदनशील यात्रा का साक्षी बना। यहां शनिवार को 69वां ग्रीन कॉरिडोर बना और तीन लोगों को नई जिंदगी मिल गई। तकनीकी कारणों से किडनी और आंखें ही दूसरे मरीजों को प्रत्यारोपित हो पाईं।

इंदौर से 70 किलोमीटर दूर शुजालपुर के निवासी कैलाश नारायण पाठक (54 वर्ष) मंडी सचिव के पद पर कार्यरत थे। बीमारी के कारण उनके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था। डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की। इस बीच मुस्कान ग्रुप के सेवादारों ने परिजनों से मुलाकात की। परिजन कैलाश का अंगदान करने के लिए तैयार हो गए और फिर डॉक्टरों ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी।

इस कठिन घड़ी में उनकी धर्मपत्नी मनोरमा, बेटियाँ प्रतिमा एवं पूजा तथा बेटे शुभम का साहस, संवेदनशीलता और समर्पण अत्यंत भावुक कर देने वाला रहा। जब परिवार से अंगदान के लिए निवेदन किया गया, तब उनकी धर्मपत्नी ने कहा कि वे अपने जीवनसाथी के अंगदान के स्वीकृति-पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले स्वयं अंगदान एवं देहदान का संकल्प लेंगी। उन्होंने पहले अपना संकल्प-पत्र भरा और उसके बाद ही अपने जीवनसाथी के अंगदान की सहमति पर हस्ताक्षर किए।

मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट के सेवादार जीतू बगानी और संदीपन आर्य ने बताया कि धर्मपत्नी के इस साहस और समर्पण को देखकर उपस्थित लोगों की आंखें भी नम हो गईं। इसके बाद शैल्बी अस्पताल से दो ग्रीन कॉरिडोर बने। एक किडनी चोइथराम अस्पताल और दूसरी किडनी एमिनेंट अस्पताल के मरीज को प्रत्यारोपित की गई। इसके अलावा नेत्रदान शंकरा अस्पताल के माध्यम से संपन्न हुआ। पाठक परिवार द्वारा सभी अंगों के दान की सहमति दी गई थी, किंतु तकनीकी कारणों से केवल किडनी एवं नेत्रदान ही संभव हो पाए। बाद में गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

इस अंगदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कराने में लगभग 60 घंटे तक लगातार जागकर सेवा, समन्वय और व्यवस्थाओं में जुटे सेवाधारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ऐसे अवसरों पर प्रत्येक क्षण महत्वपूर्ण होता है और प्रत्येक निर्णय किसी दूसरे परिवार की जीवन-आशा से जुड़ा होता है। इस सेवा यात्रा में मुस्कान सेवादार जीतू बगानी, संदीपन आर्य, हरपाल सितलानी एवं लक्की खत्री ने निरंतर सक्रिय रहकर अंगदान समन्वय, परिवार के साथ संवाद तथा आवश्यक व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शैल्बी हॉस्पिटल की टीम का विशेष सहयोग

अंगदान की पूरी प्रक्रिया में शैल्बी हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. विवेक जोशी, डॉ. अभिषेक चौरसिया, डॉ. अर्जुन पनवार, ऑर्गन डोनेशन कोऑर्डिनेटर श्रीमती हेमलता सिंह एवं शैल्बी हॉस्पिटल की समस्त टीम का पूरे समय पूर्ण सहयोग और समर्पण बना रहा। परिवार की संवेदनशील काउंसलिंग से लेकर चिकित्सकीय प्रक्रिया, अंगदान की व्यवस्थाओं और समन्वय तक मुस्कान ग्रुप सेवादारों एवं शैल्बी हॉस्पिटल की टीम ने पूरी तत्परता एवं मानवीय संवेदना के साथ अपनी भूमिका निभाई।

इस पुनीत कार्य में सांसद शंकर लालवानी की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उन्होंने इस पूरे मानवीय प्रयास के दौरान परिवार से निरंतर संपर्क एवं मॉनिटरिंग बनाए रखी तथा अंगदान की प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक समन्वय में भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया। परिवार के इस कठिन समय में उनका संवेदनशील सहयोग और सतत निगरानी इस सेवा कार्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। साथ ही इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन के अध्यक्ष एवं इंदौर संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार, इंदौर जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी, इंदौर सोसायटी फॉर ऑर्गन डोनेशन के सचिव एवं डीन, महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज, डॉ. अरविंद घंघेरिया जी तथा नोडल अधिकारी श्री मनीष पुरोहित जी का विशेष सहयोग रहा।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई

मध्य प्रदेश सरकार के आदेशानुसार, अंगदान की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात स्वर्गीय कैलाश नारायण पाठक के पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर उनके निज निवास, शुजालपुर के लिए सम्मानपूर्वक रवाना किया गया।

इंदौर का यह 69वाँ ग्रीन कॉरिडोर फिर यह संदेश दे गया कि किसी परिवार का दुःख किसी दूसरे परिवार के लिए जीवन की नई शुरुआत बन सकता है। ग्रीन कॉरिडोर केवल अस्पताल से अस्पताल तक पहुँचने वाला रास्ता नहीं, बल्कि समय के विरुद्ध जीवन बचाने की मानवीय दौड़ है। कैलाश नारायण पाठक अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके परिवार के निर्णय ने उनकी स्मृति को ऐसी विरासत प्रदान की है, जो अनेक जिंदगियों में जीवित रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर