मप्र के खरगोन में 27 झांकियों के साथ निकला भव्य शिव डोला, हर-हर महादेव से गूंजा शहर

 






- सिद्धनाथ महादेव की पालकी को पुलिस बैंड ने दी सलामी

खरगोन, 30 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के खरगोन शहर में रविवार को आस्था, परंपरा और धार्मिक उल्लास के बीच 58वां ऐतिहासिक शिवडोला राजसी ठाठ-बाट के साथ नगर भ्रमण पर निकला। अधिष्ठाता भगवान श्री सिद्धनाथ महादेव की राजसी पालकी जैसे ही भावसार मोहल्ला स्थित सिद्धनाथ महादेव मंदिर से बाहर निकली, पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय शिव शंभू’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया।

शिवडोले में 27 झांकियां, 9 नृत्य दल और 10 ढोल-ताशा व नगाड़ा पार्टियां शामिल हैं। इनमें 27 झांकियां भगवान महाकाल को समर्पित हैं। शिवडोले की सुरक्षा के लिए एक हजार से अधिक जवान और पुलिस अधिकारी तैनात किए गए हैं। एसएएफ और क्यूआरएफ की कंपनियों के साथ 8 जिलों का पुलिस बल भी लगाया गया है। शिवडोला मार्ग पर करीब 350 सीसीटीवी कैमरों और 6 ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है।

शिवडोले की शुरुआत से पहले रविवार सुबह मंदिर में भगवान सिद्धनाथ महादेव का विशेष अभिषेक और पूजन किया गया। इसके बाद भव्य धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भगवान का श्रृंगार किया गया। शिवडोला नगर भ्रमण पर निकलने से पहले मुख्य झांकी की विधायक बालकृष्ण पाटीदार, कलेक्टर गुरु प्रसाद, एसपी रवींद्र वर्मा, शिवडोला समिति अध्यक्ष नवनीत भंडारी और सकल हिंदू समाज के सदस्यों ने महाआरती की।

इसके बाद भगवान सिद्धनाथ महादेव की राजसी पालकी मंदिर से बाहर निकली। भगवान की पालकी के मंदिर से बाहर निकलते ही मध्य प्रदेश पुलिस बैंड की टीम ने सलामी दी। बैंड की धुनों और शंखनाद के बीच निकली भगवान की सवारी ने धार्मिक वातावरण को और भव्य बना दिया। पालकी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से ही मार्ग पर मौजूद थे। श्रद्धालुओं ने गुलाब के फूलों की बारिश कर शिवडोले की अगवानी की।

27 धार्मिक और पौराणिक झांकियां शामिल

मध्य प्रदेश के सबसे बड़े माने जाने वाले शिवडोले में इस बार धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विविधता की भी विशेष झलक देखने को मिली। मुख्य राजसी रथ सहित 27 धार्मिक और पौराणिक झांकियां शिवडोले में शामिल हैं। इनके साथ लोकनृत्य दल, अखाड़े, ढोल-ताशा दल, नगाड़ा दल, भजन मंडलियां और घुड़सवार भी यात्रा की शोभा बढ़ा रहे हैं। झांकियों में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों के साथ महाकाल, अंबे माता, श्रीकृष्ण-सत्यभामा, नरकासुर और संत सिंगाजी सहित कई धार्मिक एवं पौराणिक प्रसंगों को प्रस्तुत किया जा रहा है। वहीं गौरिल्ला नृत्य, शिव-पार्वती-अघोरी नृत्य, आदिवासी लोकनृत्य, मयूर नृत्य, गणगौर, कालबेलिया और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

जगह-जगह हुआ स्वागत

शिवडोला मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर 80 से अधिक सेवा मंचों के माध्यम से श्रद्धालुओं का स्वागत किया जा रहा है। सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और विभिन्न समाजों की ओर से प्रसाद, फल, खिचड़ी, भजिया, शरबत, छाछ और अन्य खाद्य सामग्री के साथ शीतल पेयजल की व्यवस्था की गई है। शहर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर भगवान की सवारी के स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। कई स्थानों पर पुष्पवर्षा, आतिशबाजी और धार्मिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। गुरु नानकदेव चौराहा क्षेत्र में शिव-शक्ति मिलन सहित विशेष आयोजन किए जाने हैं।

खरगोन का शिवडोला केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि शहर की वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और सामाजिक परंपरा का प्रतीक है। रविवार को जैसे-जैसे भगवान सिद्धनाथ महादेव की राजसी सवारी शहर के मुख्य मार्गों से आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की भीड़ और उत्साह भी बढ़ता जा रहा है। शिवडोला करीब 15 घंटे में लगभग चार किलोमीटर की दूरी तय कर देर रात पुनः सिद्धनाथ महादेव मंदिर पहुंचेगा, यहां महाआरती के बाद शिवडोले का समापन होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर