ईडी ने इंदौर नगर निगम के 103.42 करोड़ के घोटाले में 32 आरोपितों के खिलाफ पेश किया 20 हजार पन्नों का चालान

 




इंदौर, 27 जुलाई (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम में हुए 103.42 करोड़ रुपये के फर्जी बिल घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर सब-जोनल कार्यालय ने सोमवार को 32 आरोपियों के खिलाफ 20 हजार से अधिक पन्नों का अभियोजन शिकायत पत्र (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) विशेष पीएमएलए न्यायालय में पेश किया है।

ईडी के सब-जोनल कार्यालय द्वारा जानकारी दी गई कि आरोपियों में ठेकेदार, नगर निगम के अधिकारी, लोकल फंड ऑडिट और रेजिडेंट ऑडिट कार्यालय के अधिकारी तथा निजी व्यक्ति शामिल हैं। जांच में सामने आया कि फर्जी वर्क ऑर्डर, जाली बिल, फर्जी मापन पुस्तिकाओं (एमबी), झूठे पूर्णता प्रमाणपत्र और छेड़छाड़ की गई नोटशीट के जरिए 103.42 करोड़ रुपये की सरकारी राशि का गबन किया गया। मामले में ईडी अब तक 59.18 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच, जब्त या फ्रीज कर चुकी है। मामले में कथित मास्टरमाइंड अभय सिंह राठौर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

दरअसल, ईडी ने एमजी रोड थाने में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर मामले की जांच शुरू की थी। जांच में पाया गया कि कुछ ठेकेदारों ने नगर निगम और लोकल फंड ऑडिट कार्यालय के अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी वर्क ऑर्डर, जाली बिल और अन्य दस्तावेज तैयार कर सरकारी खजाने से 103.42 करोड़ रुपये निकाल लिए। इनमें कई ऐसे कार्यों के भी भुगतान किए गए, जो कभी हुए ही नहीं या पहले ही पूरे किए जा चुके थे।

नकद निकाली रकम, फिर संपत्तियां खरीदीं

ईडी के अनुसार घोटाले से निकाली गई राशि पहले नकद निकाली गई। इसके बाद अलग-अलग लाभार्थियों में बांटी गई और फर्जी व्यावसायिक लेनदेन के जरिए अन्य संस्थाओं में ट्रांसफर की गई। जांच में यह भी सामने आया कि इस रकम का उपयोग चल-अचल संपत्तियां खरीदने और निजी खर्चों में किया गया, ताकि अपराध से अर्जित धन को वैध दिखाया जा सके।

20 ठिकानों पर छापे, 22.04 करोड़ की संपत्ति फ्रीज

गौरतलब है कि ईडी ने 5 और 6 अगस्त 2024 को इंदौर समेत 20 ठिकानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान करीब 22.04 करोड़ रुपये की नकदी, बैंक खातों की राशि, एफडी, डीमैट होल्डिंग्स और म्यूचुअल फंड फ्रीज या जब्त किए गए। साथ ही कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी बरामद हुए, जिनके आधार पर आगे की जांच बढ़ाई गई।

जांच के बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत दो अस्थायी कुर्की आदेश जारी कर 37.14 करोड़ रुपये मूल्य की 52 अचल संपत्तियां अटैच कीं। इनमें मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित व्यावसायिक भवन, मकान, भूखंड और कृषि भूमि शामिल हैं। इस तरह अब तक कुल 59.18 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी है।

जांच के दौरान ईडी ने घोटाले के कथित मास्टरमाइंड अभय सिंह राठौर के साथ मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा को पीएमएलए की धारा-19 के तहत गिरफ्तार किया। एजेंसी का आरोप है कि तीनों ने घोटाले की साजिश रची और अपराध से अर्जित धन को वैध बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई ईडी ने विशेष पीएमएलए कोर्ट से अटैच, जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों को कन्फिस्केट करने की मांग भी की है। अदालत ने सभी 32 आरोपियों को समन जारी कर मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर