मप्र में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) का भव्य शुभारंभ
- प्रदेश के सभी जिलों में जन सम्मेलन-सह-लॉन्च कार्यक्रम आयोजित, हजारों नागरिकों ने की सहभागिता
भोपाल, 02 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका सृजन एवं टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [वीबी जी राम जी] का गुरुवार को प्रदेशभर में उत्साहपूर्ण शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों में जिला प्रशासन द्वारा जन सम्मेलन-सह-लॉन्च कार्यक्रम आयोजित किए गए।
केन्द्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति के ओबुलवारिपल्ले मंडल स्थित मुक्कावरिपल्ली ग्राम में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [वीबी जी राम जी] का राष्ट्रीय स्तर परभव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विकसित भारत – जी राम जी के तहत सबसे अधिक पिछड़ी पंचायतों में भी रोजगार और बुनियादी ढाँचे के लिये अधिक निधि, अधिक सहायता और अधिक अवसर मिलेंगे।
मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने संस्कारधानी जबलपुर में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [वीबी जी राम जी] का राज्य स्तर पर जन सम्मेलन-सह-लॉन्च किया। कार्यकम के दौरान उन्होंने योजना के विभिन्न आयामों और जन-कल्याणकारी नीतियों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की।
मंत्री पटेल ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक योजना की जानकारी देने के लिए नहीं, बल्कि पंचायतों के कार्यों का मूल्यांकन करने और भविष्य की कार्ययोजना तय करने का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में शासन व्यवस्था को सरल और प्रभावी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं। अंग्रेजों के समय से चले आ रहे लगभग 1400 अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त कर व्यवस्था को सरल बनाया गया है। सरकार केवल नई योजनाएं नहीं बना रही, बल्कि प्रशासनिक प्रणाली को अधिक पारदर्शी और परिणाममुखी बनाने का कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। अब पंचायतों को केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं करना है, बल्कि उनके प्रभावी संचालन, पारदर्शिता और परिणाम सुनिश्चित करने की भी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में संबल योजना के माध्यम से लगभग 1 करोड़ 84 लाख श्रमिकों का पंजीयन किया गया है और किसी भी दुर्घटना अथवा संकट की स्थिति में पात्र श्रमिकों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाती है। पंचायत प्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके क्षेत्र का कोई भी पात्र श्रमिक योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
मंत्री पटेल ने कहा कि तत्कालीन परिस्थितियों में मनरेगा की विसंगतियों को दूर कर वीबी जी रामजी योजना के नाम से नए रूप के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार योजनाओं का संचालन आवश्यक है। मौसम, फसल चक्र और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पंचायतों को कार्ययोजना बनानी होगी। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे केवल नए निर्माण कार्यों तक सीमित न रहें, बल्कि पुराने संसाधनों के संरक्षण और सुधार पर भी ध्यान दें।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत को यह लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए कि सभी पात्र परिवारों को आवास, नाली, पेयजल, सामुदायिक भवन तथा अन्य मूलभूत सुविधाएं शत-प्रतिशत उपलब्ध हों। उन्होंने पंचायतों को विशेष श्रेणियों जैसे अकेली महिलाओं, 60 वर्ष से अधिक आयु के इच्छुक श्रमिकों, बंधुआ मजदूरी से मुक्त व्यक्तियों, ट्रांसजेंडर तथा विशेष पिछड़ी जनजातियों को विशेष जॉब कार्ड जारी करने और उन्हें प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि इस वर्ष वर्षा कम होती है तो पंचायतों को जल संरक्षण, तालाब निर्माण, नहर सुधार और अन्य श्रमप्रधान कार्यों की अग्रिम योजना बनानी होगी, क्योंकि पोर्टल पर बाद में कार्य बदलना आसान नहीं होगा।
उन्होंने सोलहवें वित्त आयोग की तैयारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बार पंचायतों को पहले की अपेक्षा अधिक राशि मिलने की संभावना है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब पंचायतें समय पर उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें और स्पष्ट कार्ययोजना बनाएं। प्रत्येक पंचायत को कम से कम दो वर्षों की विकास योजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायतों में पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, सार्वजनिक भूमि तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत संरचना विकसित की जानी चाहिए।
मंत्री पटेल ने बताया कि अब पंचायतों का श्रेणीकरण किया जाएगा और उपलब्धियों के आधार पर ही योजनाओं के लिए राशि का आवंटन होगा। जिन पंचायतों में सड़क, पेयजल या अन्य मूलभूत सुविधाएं पूरी हो चुकी हैं, वहां आगे की आवश्यकताओं के अनुसार नई योजनाएं स्वीकृत की जाएंगी। उन्होंने कहा कि अब पंचायतों का ऑडिट पूरी तरह ऑनलाइन होगा और मजदूरों की उपस्थिति फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से दर्ज की जाएगी, जिससे फर्जी मस्टर रोल जैसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी।
उन्होंने टाइड और अनटाइड फंड के प्रभावी उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि पंचायतें ग्रे वाटर प्रबंधन, बड़ी नालियों का निर्माण, उपचारित जल का सिंचाई एवं सार्वजनिक उपयोग तथा स्वच्छता संबंधी कार्यों को प्राथमिकता दें। उन्होंने वृक्षारोपण को केवल औपचारिकता न मानते हुए उसकी सुरक्षा, सिंचाई और संरक्षण सुनिश्चित करने की बात कही। नर्मदा किनारे किए गए सफल वृक्षारोपण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सफलता पौधे लगाने में नहीं, बल्कि उन्हें जीवित रखने में है।
उन्होंने कहा कि तकनीक और पारदर्शिता का यह अद्भुत समागम सुशासन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ हम सभी को राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में पूरी निष्ठा के साथ जुटने की प्रेरणा देता है, केंद्र व राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और आत्मनिर्भरता के नए अवसर सृजित कर विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर कार्यरत है।
प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में प्रभारी मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता करते हुए मिशन के उद्देश्यों एवं प्रावधानों की जानकारी दी गई। राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी कराया गया, जिससे उपस्थित नागरिकों ने मिशन के उद्देश्य एवं प्रमुख प्रावधानों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रमों में पंचायत पदाधिकारी, स्व-सहायता समूहों की सदस्याएँ, श्रमिक, हितग्राही, युवा तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों ने सहभागिता की। इस अवसर पर विभिन्न जिलों में नवीन विकास कार्यों का शुभारंभ, आईईसी प्रदर्शनी, पोस्टर एवं बैनर प्रदर्शन, सफलता की कहानियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। कार्यक्रमों में उपस्थित नागरिकों को मिशन के प्रमुख प्रावधानों, विशेष रूप से 125 दिवस रोजगार गारंटी, डिजिटल कार्यप्रणाली, पारदर्शी भुगतान व्यवस्था, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी तथा विकेन्द्रीकृत ग्राम स्तरीय योजना निर्माण के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर