मध्य प्रदेश प्राकृतिक खेती अपनाने वाले राज्यों में है सबसे अव्वल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 


- मुख्यमंत्री ने किसान सम्मान निधि अंतरण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के संबोधन के सीधा प्रसारण का किया श्रवण

भोपाल, 20 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि फसलों में कीटनाशक और रासायनिक खाद का उपयोग नुकसानदेह है। इससे कैंसर जैसी कई घातक बीमारियां जन्म लेती हैं। सरकार ने किसानों को पुन: प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए पहल की है, इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। आज हमारा मध्य प्रदेश देश में सर्वाधिक प्राकृतिक खेती करने वाला राज्यों में अव्वल स्थान पर है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को भोपाल के बरखेड़ीकला स्थित राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान (सिपेट) में 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह कृषक संगोष्ठी' को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती की उपज को उचित दाम दिलवाने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। हमारी प्राकृतिक खेती से दुनिया लाभान्वित हों, इसी भाव से कार्य करते हुए प्रदेश में तेजी से गोशालाओं का विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हमारी गौमाता प्राकृतिक खेती में सबसे अधिक मददगार प्राणी है। किसान गोबर और गौमूत्र से खाद बनाकर खेतों में डालें, इसी उद्देश्य से गौपालक किसानों को हमारी सरकार हर महीने 1100 रुपये प्रति गाय की दर से आर्थिक सहायता दे रही है। गौ-आधारित कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित तारकेश्वर से देश के 9.40 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किश्त के रूप में कुल 18 हज़ार 880 करोड़ रुपये पात्र किसानों के खातों में अंतरित किए। कार्यक्रम से मध्य प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में 1640 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरूआत फरवरी 2019 में हुई थी। इसके तहत हर साल दो-दो हजार की तीन समान किश्तों में छह हजार रुपये किसान भाइयों को दिए जाते हैं। अब तक प्रदेश के किसान भाइयों को 22 किश्तों में 33 हजार 800 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। शनिवार को 23वीं किश्त का अंतरण किया गया। पश्चिम बंगाल में हुए इस कार्यक्रम का देशभर में सीधा प्रसारण किया गया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बरखेड़ीकला स्थित राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान (सिपेट) में 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह कृषक संगोष्ठी' में पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी के संपूर्ण संबोधन का श्रवण किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की।

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम रामराज्य की संकल्पना को साकार होते देख रहे हैं। प्रधानमंत्री ने गांव, गरीब, अन्नदाता किसान, युवा और नारी सहित सभी वर्गों के कल्याण से विश्व में भारत की अलग ही पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य प्रदेश को दो-दो नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात दी है। इससे प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा और उनके सूखे खेतों में फसलें लहलहाएंगी।

उन्होंने कहा कि आज देश के हर गांव-कस्बे तक बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का जाल बिछ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ही देश के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि देने की योजना प्रारंभ की है। यह हमारे अन्नदाता के अथक परिश्रम का सम्मान है। मध्य प्रदेश सरकार भी किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। हम किसानों के कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने पीएम किसान सम्मान निधि पाने वाले प्रदेश के सभी किसानों को बधाई दी और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। इस अवसर पर विधायक रामेश्वर शर्मा, जनप्रतिनिधि रविन्द्र यति, अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल, आयुक्त अनुभा श्रीवास्तव, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को उपज का सही दाम मिले, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। पहले सोयाबीन पर भावांतर योजना के माध्यम लाभ दिया, उसके बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देकर किसानों से गेहूं उपार्जित किया। राज्य सरकार ने किसानों से गेहूं का एक-एक दाना खरीदकर उन्हें प्रति क्विंटल 2625 रुपये भुगतान किया है। हमारी सरकार प्राकृतिक खेती के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है। इससे धरती माता की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी और विदेशी रासायनिक खाद पर निर्भरता भी घटेगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के नागरिकों को प्राकृतिक तरीके से उगाए देसी ज्वार, बाजरा और गेहूं-चना का स्वाद मिलेगा। किसानों को दूध उत्पादन से भी जोड़ा जा रहा है। इसका दोहरा लाभ आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक खाद निर्माण में भी मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती में मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है। कम सिंचाई में भी फसल अच्छी होती है। प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक तकनीक ही नहीं, धरती माता, किसान और उपभोक्ता- तीनों के स्वास्थ्य की रक्षा का अभियान है। जलवायु परिवर्तन के दौर में यह एक महत्वपूर्ण समाधान है। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ियों के लिए जल बचाना हम सबका कर्तव्य है, हम सबको जल संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।

प्रदेश में प्राकृतिक खेती

मध्य प्रदेश देश का अग्रणी कृषि राज्य है। गेहूं, सोयाबीन और दलहन उत्पादन में प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश प्राकृतिक खेती में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में 3 लाख एकड़ में जैविक/प्राकृतिक खेती की जा रही है। प्रदेश के 56 कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि महाविद्यालयों द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए तकनीकी मदद और प्रशिक्षण किसानों को दिए जा रहे हैं। सरकार प्रदेश में एक हजार से अधिक बॉयो रिसर्च सेंटर बना रही है। ये सेंटर प्राकृतिक खेती में किसानों की मदद करेंगे। प्राकृतिक खेती के उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। देश और विदेश में इनके लिए विशेष बाजार विकसित हो रहे हैं। ब्रांडिंग और प्रमाणन से किसानों को अधिक मूल्य मिलता है। यह आय वृद्धि का बड़ा अवसर है। किसानों की मदद के लिए 3 हजार से ज्यादा कृषि सखी, 200 से अधिक कृषि वैज्ञानिकों को भी प्रशिक्षित किया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर