वर्ष 2027 में होगी भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, प्रधानमंत्री को करेंगे आमंत्रित: मोहन यादव

 










- प्रधानमंत्री मोदी एमएसएमई सेक्टर में भारत को बना रहे ग्लोबल चैम्पियन, लघु उद्योगों को बढ़ावा देने में मप्र सबसे आगे: मुख्यमंत्री

भोपाल, 27 जून (हि.स.)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लघु उद्योगों को बढ़ावा देने में मध्य प्रदेश सबसे आगे है। उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया भोपाल में जाएगा। समिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में विश्व एमएसएमई दिवस पर हुई सशक्त उद्यमी : समृद्ध मध्य प्रदेश समिट को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एमएसएमई सेक्टर में भारत को ग्लोबल चैम्पियन बना रहे हैं। उद्योग और व्यवसाय क्षेत्र दूसरों के जीवन को सुखद बनाते हैं। उद्यमी कर्म को पूजा और श्रम को साधना मानते हैं। आने वाले समय में औद्योगिक क्षेत्र की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होगी और सुख का सूरज निकलेगा।

उन्होंने कहा कि देश में लगभग 7 करोड़ एमएसएमई इकाइयां हैं, जिसमें 25 लाख मध्य प्रदेश में हैं। प्रदेश की इकाइयां लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रही है। जीडीपी में 31 प्रतिशत की हिस्सेदारी एमएसएमई सेक्टर की है। निर्यात में 49 प्रतिशत और विनिर्माण उत्पादन में इस क्षेत्र का योगदान 35 प्रतिशत है। इस तरह एमएसएमई सेक्टर अर्थव्यवस्था के इंजन के रूप में कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश का एमएमसएमई सेक्टर जनकल्याण का माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उद्यमियों द्वारा प्रदर्शित विभिन्न उत्पादों, कला शिल्पों की विशाल प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यह प्रदर्शनी रविवार 28 जून को भी सभी के लिए खुली रहेगी। शासन द्वारा कपास पर मंडी शुल्क आधा करने सहित उद्यमियों और किसानों के हित में अनेक निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा अभिनंदन किया गया। समिट में लगभग 2000 उद्यमियों, निवेशकों, स्व-सहायता समूहों के सदस्यों सहित नीति निर्माताओं ने भागीदारी की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में रिमोट से एमएसएमई इकाइयों के साथ ही वृहद उद्योगों के लिए भी राशि जारी की। एमएसएमई इकाइयों को 225 करोड़ 19 लाख की राशि और विभिन्न स्टार्ट-अप के लिए लगभग 39 लाख की राशि प्रदान की गई। बड़े उद्योगों को निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 1274 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई। इस तरह कुल 1500 करोड़ रुपये उद्योग क्षेत्र को प्रदान किए गए। इसके साथ ही मध्य प्रदेश देश का एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है, जहां मई 2026 तक की समस्त देनदारी का भुगतान उद्यमियों को निवेश सहायता के रूप में किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के विकास में मध्य प्रदेश आगे है। राज्य सरकार द्वारा कपास के मंडी शुल्क को आधा करने के निर्णय का लाभ किसानों और उद्यमियों को प्राप्त होगा। एमएसएमई दिवस पर एमओयू और उद्योगों के लिए भूखंडों के आवंटन का कार्य हुआ है। राज्य में प्रत्येक जगह उद्योग लगाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आने वाले समय में मध्य प्रदेश देश के सबसे इंडस्ट्री प्रोमोटिंग स्टेट के रूप में पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा कि कनाडा, यूके, अमेरिका, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से प्रदेश में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, मेडिकल डिवाइस आदि क्षेत्रों में निवेश आ रहा है। भोपाल में वर्ष 2025 में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद 9 हजार 300 करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतरा हैं।

नई नीतियां और नियम बने लाभकारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत दो वर्ष में बनाई गई 18 नई नीतियों और नए नियमों का लाभ उद्योगों को मिल रहा है। प्रदेश में ओडीओपी क्षेत्र में भी प्रगति है। वर्ष 2025- 26 में मध्य प्रदेश को 20 जीआई टैग प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 युवा वर्ष की थीम पर मनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 4 लाख 41 हजार से अधिक एमएसएमई यूनिट्स का जिम्मा माताओं-बहनों के हाथों में है। गत वर्षों के मुकाबले वर्ष 2024 से 2026 के बीच एमएसएमई में नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व 67 प्रतिशत बढ़ा है। राज्य सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए 16 क्लस्टर्स का निर्माण किया है और 14 नए क्लस्टर्स पर काम चल रहा है। राज्य को ओडीओपी में उल्लेखनीय सफलता मिली है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए विकसित मध्य प्रदेश का निर्माण करना भी आवश्यक है। वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को शून्य ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है। किसानों को ऋण चुकाने के लिए नई सौगात दी गई है। किसान जिस तारीख को ऋण लेंगे, उसके 12 माह की अवधि में ऋण भर सकेंगे। इसके लिए 31 मार्च की बाध्यता खत्म कर दी गई है।

मध्य प्रदेश औद्योगिक सुधारों को लागू करने में आगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भारत सरकार द्वारा तय 23 औद्योगिक सुधारों को शत-प्रतिशत लागू करने में मध्य प्रदेश टॉप अचीवर है। औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार ने दृढ़ संकल्प लिया है। आज प्रदेश के 13 जिलों में 14 औद्योगिक केंद्र और भवनों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया गया है। इसी तरह 7 नए औद्योगिक क्षेत्र इंडस्ट्री सेक्टर को नया आकार प्रदान करेंगे।

उद्यमियों से किया संवाद

मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों के उद्यमियों से संवाद के दौरान कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले से प्राप्त होने वाले राजस्व के मॉडल तैयार करने का कार्य करेगी, जिससे जिले की अनुकूलता के आधार पर व्यापार-व्यवसाय को प्रोत्साहन देते हुए समृद्धि का पूरा लाभ मिले। विधायक अर्चना चिटनिस के नेतृत्व में मध्यांचल कॉटन एंड जिंजर ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कपास पर मंडी शुल्क आधा करने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गजमाला से अभिनंदन किया।

कार्यक्रम में एमएसएमई मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप और मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह, उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार, सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

उद्यमियों ने कहा- मध्य प्रदेश उद्योगों को बढ़ाने वाला राज्य

समिट में उद्यमी डॉ. पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश सिर्फ उद्योग स्थापित करने नहीं, बल्कि उद्योग को आगे बढ़ाने वाला राज्य है। किसी भी उद्योग की स्थापना के दौरान अनेक प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं। राज्य सरकार के प्रयासों से उद्योग अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है। मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियां बहुत पारदर्शी हैं। राज्य सरकार की ओर से हमें मिला सहयोग सफलता की पूंजी है। हमारी कंपनी राज्य में 200 करोड़ का निवेश कर चुकी है। आगामी दो वर्षों में मेडिसिन रिसर्च के लिए हमारी कंपनी राज्य में 50 करोड़ का नया निवेश करेगी। मध्य प्रदेश तेजी से फॉर्मा सेक्टर में अनुसंधान का हब बन रहा है।

लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष राजेश मिश्रा ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने प्रत्येक विभाग में निवेश प्रोत्साहन सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की है। मध्य प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सरकार ने 31 मई 2026 तक की सभी देनदारियां क्लियर की हैं। निश्चित ही यह उद्यमियों और निवेशकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर