मप्रः विश्व धरोहर सांची में समृद्ध बौद्ध विरासत और स्थापत्य कला को देख अभिभूत हुए ब्रिक्स डेलीगेट्स
- ब्रिक्स डेलिगेड्स ने सांची को बताया शांति और आध्यात्मिकता का अद्भुत केंद्र
भोपाल, 08 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर सांची के भ्रमण के दौरान ब्रिक्स डेलीगेट्स हजारों वर्ष पुरानी भारतीय स्थापत्य कला, पत्थरों पर उकेरी गई बौद्ध संस्कृति और भगवान बुद्ध के शांति एवं करुणा के संदेश से जुड़े बौद्ध स्तूप को देखकर अभिभूत हो गए।
दरअसल, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित चार दिवसीय ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 के समापन के बाद शनिवार शाम को ब्रिक्स देशों से आए प्रतिनिधि भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत और स्थापत्य कला को देखने के लिए विश्व धरोहर स्थल सांची पहुंचे। ब्राज़ील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, रूस सहित ब्रिक्स डेलीगेट्स के 42 सदस्यीय दल द्वारा केन्द्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के साथ जम्बू द्वीप पार्क, म्यूजियम तथा बौद्ध स्तूप का भ्रमण किया गया।
इस दौरान मप्र शासन के संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र लोधी भी उनके साथ रहे। ब्रिक्स डेलीगेट्स के सांची पहुंचने पर रायसेन कलेक्टर अरूण कुमार विश्वकर्मा की अगवानी में उनका स्वागत भारतीय संस्कृति के अनुरूप तिलक लगाकर किया गया।
ब्रिक्स डेलीगेट्स सांची भ्रमण के दौरान हजारों वर्ष पुरानी भारतीय स्थापत्य कला, पत्थरों पर उकेरी गई बौद्ध संस्कृति और भगवान बुद्ध के शांति एवं करुणा के संदेश से जुड़े बौद्ध स्तूप को देखकर अभिभूत नजर आए। उन्होंने सांची की ऐतिहासिक विरासत को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत उदाहरण बताया। इस दौरान उन्होंने मुख्य स्तूप सहित परिसर में स्थित प्राचीन संरचनाओं, तोरण द्वारों, स्तंभों तथा शिल्पकला को करीब से देखा। विशेषज्ञों एवं गाइड द्वारा प्रतिनिधियों को सांची के इतिहास, बौद्ध धर्म के प्रसार और यहां स्थित स्मारकों की स्थापत्य विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
पत्थरों पर जीवंत है बौद्ध संस्कृति की कहानी
बौद्ध स्तूप के तोरण द्वारों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी ने ब्रिक्स डेलीगेट्स का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इन शिल्पों में बौद्ध परंपरा, जातक कथाओं, प्रकृति, पशु-पक्षियों तथा तत्कालीन सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक दृश्य अंकित है। ब्रिक्स डेलीगेट्स को बताया गया कि सांची में बौद्ध स्मारकों की स्थापना का संबंध मौर्य सम्राट अशोक के काल से है। सांची को बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया गया। विदेशी प्रतिनिधियों ने सांची के इतिहास और यहां की स्थापत्य विरासत को लेकर विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने स्मारकों की तस्वीरें भी लीं और परिसर के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन किया।
हजारों वर्ष पुरानी विरासत को अपनी आंखों से देखना अविस्मरणीय अनुभव
सांची का महत्व केवल ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भी है। भगवान बुद्ध के शांति, अहिंसा, करुणा और मानवता के संदेश से जुड़े इस विश्व धरोहर ने ब्रिक्स डेलीगेट्स को विशेष रूप से प्रभावित किया। ब्रिक्स डेलीगेट्स ने सांची को ऐसी ऐतिहासिक धरोहर बताया, जहां प्राचीन भारत की संस्कृति के साथ विश्व शांति का संदेश भी महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुस्तकों और तस्वीरों में किसी ऐतिहासिक स्थल को जानना अलग अनुभव है, लेकिन सांची पहुंचकर हजारों वर्ष पुरानी विरासत को अपनी आंखों से देखना अविस्मरणीय अनुभव है।
इस अवसर पर संस्कृति विभाग के अपर मुख्य प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला, भोपाल संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा, मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध निदेशक इलैया राजा टी, मध्य प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड के अतिरिक्त प्रबंध निदेशक अभय बेडेकर तथा भोपाल से आए वरिष्ठ अधिकारीगण, पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
लाइट एण्ड साउंड शो ने किया बौद्ध इतिहास और कला को जीवंत
ब्रिक्स डेलीगेट्स के दल ने सांची में स्तूप भ्रमण के उपरांत शाम के समय परिसर में लाइट एण्ड साउंड शो के जरिए बौद्ध इतिहास और कला का जीवंत अनुभव किया। प्रतिनिधियों को थ्री-डी प्रजेन्टेशन के माध्यम से बौद्ध संस्कृति, भगवान गौतम बुद्ध के जीवन-दर्शन और उनकी शिक्षाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। लाइट एंड साउंड शो के दौरान भगवान बुद्ध के जीवन, उनके त्याग, ज्ञान प्राप्ति, करुणा, शांति और मानवता के संदेश को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर