ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठकः सांस्कृतिक संपदा को वापस लाने पर मंथन, भोपाल घोषणापत्र जारी

 








भोपाल, 08 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में चल रहे चार दिवसीय ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 शनिवार को आयोजित 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक के साथ संपन्न हो गया। इसके समापन अवसर पर भोपाल घोषणापत्र जारी किया गया, साथ ही सभी देशों के कलाकारों को मौका देने, चोरी या गलत रास्ते से विदेशों में पहुंची सांस्कृतिक संपदाओं को वापस लाने का निर्णय लिया गया।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन का समापन भोपाल घोषणापत्र को अपनाने के साथ हुआ, जो ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक और दूरदर्शी ढांचा प्रदान करता है।

उन्होंने बताया कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स संस्कृति ट्रैक ने तीन संस्कृति कार्य समूह बैठकों के माध्यम से प्रगति की। पहली बैठक 29-30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल रूप से आयोजित की गई। इसके बाद दूसरी बैठक 4-5 जून 2026 को वाराणसी में और तीसरी बैठक 5-6 अगस्त 2026 को भोपाल में हुई। आज आयोजित मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत सहित 14 देशों ने भाग लिया, जिनमें 10 ब्रिक्स सदस्य देश और 4 भागीदार देश शामिल थे। भाग लेने वाले ब्रिक्स सदस्य देश ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात थे, जबकि मिस्र ने मंत्रिस्तरीय बैठक में ऑनलाइन भाग लिया। भागीदार देश बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड थे। इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के संस्कृति मंत्रियों ने भी मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लिया। बैठकों में कुल 55 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

केन्द्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि ‘लचीलापन, नवाचार और स्थिरता’ विषयक इस सम्मेलन में संवाद को व्यावहारिक पहलों में बदलने और संस्कृति के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया। पहली बार समयावधि लक्ष्य तय किए हैं। सांस्कृतिक और विरासत को लेकर साझा रोडमेप तैयार किया। डिजिटल माध्यम भी इस घोषणा पत्र में तैयार किया गया। सांस्कृतिक संपदाओं को वापस लाने की भी पहल इस डॉक्यूमेंट में की गई है।

उन्होंने बताया कि भोपाल घोषणा का उद्देश्य ब्रिक्स सांस्कृतिक सहयोग के संस्थागत ढांचे को सुदृढ़ करना, संस्कृति और विरासत के समकालीन एवं पारंपरिक क्षेत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए साझा रोडमैप प्रदान करना है। एक प्रमुख क्षेत्र सांस्कृतिक एवं रचनात्मक उद्योग तथा रचनात्मक अर्थव्यवस्था में सहयोग है। जिसमें कार्यप्रणालियों, अनुभवों और श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान, रचनाकारों को सहयोग, नेटवर्किंग तथा डिजिटल साधनों के माध्यम से बाजार तक पहुंच के अवसरों का विस्तार शामिल हैं।

घोषणा में यूनेस्को की बहुराष्ट्रीय नामांकन प्रक्रियाओं पर सहयोग को बढ़ाने का प्रावधान है, जिसका उद्देश्य साझा और परस्पर संबद्ध सांस्कृतिक विरासत की मान्यता तथा संरक्षण के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करना है। यह सांस्कृतिक संपदा के उद्गम-अनुसंधान तथा उसकी वापसी और पुनर्स्थापन को भी बढ़े हुए सहयोग के क्षेत्र के रूप में चिन्हित करती है। जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ट्रेसिंग टूल्स की संभावनाओं का पता लगाना शामिल हैं।

पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का संरक्षण भी घोषणा में शामिल महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जिसमें पीढ़ियों से हस्तांतरित सांस्कृतिक ज्ञान और अभिव्यक्तियों की सुरक्षा एवं निरंतरता की आवश्यकता को स्वीकार किया गया है। घोषणा में संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागार के बीच विशेष रूप से दस्तावेजी विरासत, डिजिटलीकरण और संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा दिया गया है। इससे सांस्कृतिक और दस्तावेजी संसाधनों के संरक्षण में संस्थागत आदान-प्रदान तथा विशेषज्ञता साझा करने की व्यापक संभावनाएँ उपलब्ध होंगी। रचनाकारों के अधिकार भी सहमति से निर्धारित सहयोग के क्षेत्रों का हिस्सा हैं। घोषणा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों में कॉपीराइट संरक्षित कृतियों के उपयोग के संबंध में पारदर्शिता तथा उचित और न्यायसंगत पारिश्रमिक का विषय शामिल हैं।

स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री ब्रिक्स संस्कृति ट्रैक के अंतर्गत ठोस पहल के रूप में भारत ने स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री विकसित करने के लिए एक पायलट पहल की घोषणा की। प्रस्तावित रजिस्ट्री का उद्देश्य सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुगम बनाना, पेशेवर नेटवर्क को सुदृढ़ करना तथा ब्रिक्स देशों के कलाकारों और रचनात्मक क्षेत्र के पेशेवरों के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। यह विभिन्न देशों के कलाकारों को जोड़ने और सतत सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुगम बनाने के लिए एक व्यावहारिक तंत्र के रूप में कार्य करेगी। यह पहल जन-से-जन संपर्क को सुदृढ़ करने और सांस्कृतिक क्षेत्र के पेशेवरों को ब्रिक्स के समकक्षों के साथ जुड़ने के अवसर प्रदान करने के व्यापक उद्देश्य का भी समर्थन करती है।

द्विपक्षीय सहभागिता संस्कृति ट्रैक ने भाग लेने वाले देशों के साथ द्विपक्षीय सहभागिता का अवसर भी प्रदान किया। भाग लेने वाले देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें संस्कृति मंत्री और संस्कृति मंत्रालय के सचिव के स्तर पर आयोजित की गईं। इन बैठकों में द्विपक्षीय सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा पारस्परिक हित के क्षेत्रों का पता लगाने के लिए विचारों का आदान-प्रदान हुआ। इन द्विपक्षीय बैठकों ने बहुपक्षीय विचार-विमर्श को पूरक बनाया और भाग लेने वाले देशों को व्यापक ब्रिक्स सांस्कृतिक एजेंडा के साथ विशिष्ट द्विपक्षीय हित के सहयोग क्षेत्रों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया।

गौरतलब है कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का एक प्रमुख सांस्कृतिक घटक 6-7 अगस्त 2026 को भोपाल में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव था। इस महोत्सव में ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों ने भाग लिया, जिनमें बेलारूस, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूस और संयुक्त अरब अमीरात शामिल थे। इनके सांस्कृतिक प्रदर्शनों ने अपनी समृद्ध और विविध कलात्मक परंपराओं को प्रदर्शित किया। शाश्वत भारतीय आदर्श वाक्य सर्वे भर्वन्तु सुखिनः पर केंद्रित इस महोत्सव ने सांस्कृतिक संवाद, कलात्मक आदान-प्रदान और जनसंपर्क के लिए जीवंत मंच प्रदान किया। दूसरे दिन, ब्रिक्स देशों की विभिन्न भाषाओं में एक सामूहिक प्रस्तुति ने सांस्कृतिक विविधता के माध्यम से एकता का प्रतीक प्रस्तुत किया।

संस्कृति ट्रैक ने द्विपक्षीय सहयोग का अवसर भी प्रदान किया। सहभागी देशों के साथ संस्कृति मंत्री और संस्कृति मंत्रालय के सचिव के स्तर पर द्विपक्षीय बैठकें आयोजित की गईं, जिससे द्विपक्षीय सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने और पारस्परिक हित के क्षेत्रों का पता लगाने पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिला। इस कार्यक्रम ने अतिथि प्रतिनिधिमंडलों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत का अनुभव करने का अवसर प्रदान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर