आकाश में सोमवार को होगी अद्भुत खगोलीय घटना, सूर्य से अधिकतम दूरी पर पहुंचेगी पृथ्वी

 


- सोमवार रात 11 बजे पृथ्वी और सूर्य के बीच होगी रिकॉर्ड 15.2 करोड़ किमी की दूरी

भोपाल, 05 जुलाई (हि.स.)। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए सोमवार, 06 जुलाई का दिन बेहद खास होने जा रहा है। इस दिन हमारा ग्रह पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते हुए उससे अपने पूरे साल के सबसे दूरस्थ बिंदु पर पहुंच जाएगा।

मध्य प्रदेश की नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने रविवार को इस संबंध में वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारतीय समयानुसार 6 जुलाई को रात 11:00 बजे पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी सबसे अधिकतम होगी। खगोल विज्ञान में इस अद्भुत खगोलीय घटना को एफ़ेलियन कहा जाता है।

सारिका ने बताया कि पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर घूमने की कक्षा पूरी तरह गोल न होकर थोड़ी अंडाकार है। इस वजह से साल में एक बार पृथ्वी सूर्य के सबसे करीब होती है और एक बार सबसे दूर। रविवार, 6 जुलाई को होने वाली इस खगोलीय घटना के समय पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी बढ़कर लगभग 15 करोड़ 20 लाख किलोमीटर हो जाएगी, जबकि तीन जनवरी को पृथ्वी जब सूर्य के सबसे नजदीक थी, तब उनके बीच की दूसरी लगभग 14 करोड़ 70 लाख किमी थी। इस खगोलीय घटना को पेरिहेलियन कहा जाता है।

सारिका ने बताया कि आम तौर पर लोग सोचते हैं कि सूर्य से दूरी बढ़ने पर ठंड होनी चाहिए, लेकिन भारत सहित उत्तरी गोलार्ध में इस समय गर्मी है। इस विरोधाभास को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि मौसमों का बदलना सूर्य से पृथ्वी की दूरी पर निर्भर नहीं करता, बल्कि पृथ्वी की धुरी के झुकाव पर निर्भर करता है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में पृथ्वी अपनी धुरी पर साढ़े 23 डिग्री डिग्री झुकी हुई है और इसका उत्तरी गोलार्ध सूर्य की तरफ झुका हुआ है। इस वजह से इन दिनों भारत सहित उत्तरी गोलार्ध के देशों को सूर्य की सीधी और तीखी किरणें मिल रही हैं, जिससे गर्मी पड़ रही है। इसके विपरीत, दक्षिणी गोलार्ध जैसे ऑस्ट्रेलिया में सूर्य की किरणें तिरछी पड़ रही हैं, जिससे वहां इस समय सर्दियों का मौसम है।

सारिका ने बताया कि इस दूरी के कारण सूर्य का आकार आकाश में सामान्य से लगभग 3.4% छोटा दिखाई देता है, लेकिन इसे हम अपनी नंगी आंखों से महसूस नहीं कर सकते। उन्होंने आम जनता और बच्चों से अपील की है कि वे इस एफ़ेलियन डे को विज्ञान को समझने के एक अवसर के रूप में लें, लेकिन भूलकर भी सूर्य को सीधे नंगी आंखों या साधारण दूरबीन से न देखें।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर