मप्र के ग्वालियर में अडाणी डिफेंस ने भारतीय सेना को सौंपी 2,000 ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन
- दुश्मन को एक हजार मीटर दूर से मार गिराने की क्षमता, एक मिनट में 700 राउंड फायरिंग
ग्वालियर, 28 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस कंपनी ने शनिवार को भारतीय सेना को 2,000 ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन (एलएमजी) की पहली खेप सौंपी। यह 7.62 मिमी कैलिबर के हथियार ग्वालियर के स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स में बनाए गए हैं।
बताया गया है कि सरकार इन हथियारों का इस्तेमाल एलएसी और एलओसी पर सुरक्षा और मारक क्षमता बढ़ाने के लिए करेगी। ‘प्रहार’ एलएमजी की मारक क्षमता एक हजार मीटर तक है, जिससे दुश्मनों को दूर से निशाना बनाया जा सकता है। मशीन गन का वजन आठ किलोग्राम और लंबाई 1100 एमएम है। इससे एक मिनट में 700 राउंड फायरिंग की जा सकती है।
ग्वालियर स्थित अडानी डिफेंस प्लांट में शनिवार को सेना को एलएमजी सौंपने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें रक्षा मंत्रालय के डीजी ए. अंबरासु, कंपनी के सीईओ आशीष राजवंशी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने मशीन गन की पहली खेप लेकर जा रहे ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
छह साल में पूरा हुआ प्रोजेक्ट, समय से पहले डिलीवरी
कंपनी के सीईओ आशीष राजवंशी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को बोली जमा करने से लेकर डिलीवरी तक पूरा करने में करीब छह साल लगे। कंपनी ने निर्धारित समय से 11 महीने पहले पहली खेप सौंप दी है। पूरा ऑर्डर देने के लिए पहले सात साल से ज्यादा का समय तय था, लेकिन कंपनी इसे अगले 3 साल के भीतर पूरा कर देगी।
40,000 मशीन गन का ऑर्डर
उन्होंने बताया कि एलएमजी का कुल ऑर्डर लगभग 40,000 यूनिट का है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ए. अंबरासु ने समय से पहले डिलीवरी की सराहना करते हुए कहा कि इससे साबित होता है कि प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने की क्षमता मौजूद है।
सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी पर जोर
अंबरासु ने कहा कि सरकार रक्षा उद्योग के साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने “गति” और “पैमाना” को रक्षा खरीद के दो अहम स्तंभ बताया। उन्होंने यह भी कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार और निजी कंपनियों को साथ मिलकर काम करना होगा।
प्लांट की क्षमता और तकनीक
ग्वालियर में बना यह केंद्र करीब 100 एकड़ में फैला है और इसका सालाना उत्पादन लगभग एक लाख हथियारों का है। इसमें इस्तेमाल होने वाली 90 फीसदी से ज्यादा सामग्री देश में ही तैयार की जाती है। यहां एक अंडरग्राउंड फायरिंग रेंज भी है, जहां अधिकारियों ने निशानेबाजी का अभ्यास किया। कंपनी के अनुसार, इस केंद्र में हर साल लगभग 30 करोड़ छोटे कैलिबर के गोला-बारूद बनाने की क्षमता है। साथ ही बड़े और मध्यम कैलिबर के गोला-बारूद के उत्पादन की क्षमता बढ़ाने की योजना भी है।
कंपनी ने बताया कि हर हथियार को सेना में शामिल करने से पहले कई परीक्षणों से गुजरना पड़ता है। इसमें बैलिस्टिक टेस्ट, पर्यावरणीय जांच और अन्य तकनीकी मूल्यांकन शामिल हैं, ताकि हथियार पूरी तरह भरोसेमंद और विश्वसनीय हों। भविष्य की योजना के तहत यह केंद्र क्लोज क्वार्टर बैटल हथियार बनाने के लिए तैयार है। इससे देश में छोटे हथियारों के निर्माण की क्षमता और बढ़ेगी। कंपनी का लक्ष्य अप्रैल 2026 से हर महीने लगभग 1,000 एलएमजी का उत्पादन शुरू करना है। पूरा ऑर्डर 3 साल से भी कम समय में पूरा कर दिया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर