मप्र ने सिकल सेल एनिमिया में हासिल की बहुआयामी उपलब्धि : द्रौपदी मुर्मु
- ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस समारोह में शामिल हुईं राष्ट्रपति, प्रदर्शनी का किया अवलोकन
खंडवा, 19 जून (हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूकता, समय पर जांच और इलाज को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में 1.32 करोड़ लोगों के स्क्रीनिंग की लक्ष्य समय से पहले पूरा हुआ है। सिकल सेल एनिमिया में इस बहुआयामी उपलब्धि के लिए मैं राज्य सरकार की सराहना करती हूं।
राष्ट्रपति मुर्मु शुक्रवार को मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित पवित्र तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित कर रही थीं। इसके पूर्व राष्ट्रपति ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने यहां लगाई गई सिकल सेल से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति ने कहा कि सिकल सेल से जुड़ी चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया और पिछले कुछ वर्षों में एक समग्र दृष्टि से सरकार ने जो प्रयास किये हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। मिशन मोड में हुई स्क्रीनिंग का ही परिणाम है कि अभी तक लगभग ढाई लाख लोगों में सिकल सेल संबंधी रोग चिन्हित किये जा चुके हैं और इस रोग के 20 लाख से भी अधिक वाहक भी पहचाने जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि गत वर्ष 17 सितंबर से 02 अक्टूबर तक चले “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” के अंतर्गत मध्य प्रदेश ने 4 लाख से अधिक महिलाओं की सिकल सेल स्क्रीनिंग का कीर्तिमान स्थापित करके इस समस्या के समाधान के लिए अमूल्य योगदान दिया है। मुझे विश्वास है कि सभी प्रदेशों की समेकित शक्ति और सक्रियता से हम वर्ष 2047 से बहुत पहले ही देश से सिकल सेल संबंधी रोगों के उन्मूलन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य में अवश्य सफल होंगे।
उन्होंने कहा कि सिकल सेल एनिमिया में मध्य प्रदेश सरकार ने बहुआयामी उपलब्धि हासिल किया है। ये संतोष की बात है कि 2023 में राष्ट्र मिशन में उन्होंने जो लक्ष्य देश के सामने रखे थे। उसमें स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि जितना मुझे बताया गया है उसमें 1.32 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग पूरी हो गई है। इनमें ज्यादातर को लोगों को जेनेटिक कॉउंसलिंग कार्ड भी दिया गया है। सिकल सेल से जुड़े चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया है। पिछले कुछ वर्षों से समग्र रुप से जो प्रयास किए है, वे अत्यंत सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्य प्रदेश के शहडोल से एनिमिया सिकल सेल मिशन को लॉंच किया था। मुझे बताया गया कि केंद्रीय स्वास्थय मंत्रालय और केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रुप में देश में पहली बार ऐसा मिशन पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि केवल स्वास्थय से जुड़ी समस्याओं के रुप में नहीं देखा जाता है। इसे जनजातीय स्वास्थय का मुद्दा, अनुवांशिका से जुड़े जागरुकता और प्रीवेंटिव हेल्थ कैयर की चुनौती से सामाजिक आचरण में बदलाव के रुप में भी देखा गया है। मुझे बताया गया है कि इस मिशन की पृष्टभूमि में स्तरों पर किए गए वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। आईसीएमआर, ट्राइबल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट, एम्स, एनएएचएम और विभिन्न राज्यों सरकारों ने इस विषय पर विभिन्न आयामों पर काम किया है। मैं यह जानकार खुश हूं, आज मैं कुछ स्टॉल को देख रही थी। केवल एलोपेथ नहीं, आयुर्वेद भी इसमें रिसर्च करके निकाले है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ओंकार महाराज और मां नर्मदा की पावन भूमि पर आज विश्व सिकल सेल दिवस कार्यक्रम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नेतृत्व में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और राज्यपाल मंगूभाई पटेल शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, तभी इस अभियान की नींव रखी गई थी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में शहडोल से सिकल सेल उन्मूलन अभियान 2.0 की शुरुआत हुई। पिछले तीन वर्षों में मध्य प्रदेश में 1 करोड़ 32 लाख लोगों की सिकल सेल जांच (स्क्रीनिंग) की जा चुकी है। वर्ष 2027 से पहले 01 करोड़ 60 लाख स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल पटेल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस अभियान की लगातार निगरानी की और हर दो महीने में समीक्षा बैठक लेकर इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में सिकल सेल मरीजों, नियमित रक्तदाताओं और समाज में जागरूकता फैलाने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। आयोजन स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी के माध्यम से सिकल सेल एनीमिया की पहचान, स्क्रीनिंग और इलाज प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर