25 वर्षों से लंबित सोन नदी जल बंटवारे के समाधान की दिशा में ऐतिहासिक कदम, बिहार-झारखंड के बीच एमओयू

 


नई दिल्ली, 31 अगस्त (हि.स.)।

कर्तव्य भवन, नई दिल्ली में केद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता एवं सी.आर.पाटिल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री; सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री, बिहार सरकार एवं हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखंड सरकार, विजय कुमार चौधरी उप मुख्य (जल संसाधन) मंत्री की उपस्थिति में बिहार सरकार और झारखंड सरकार के बीच सोन नदी जल बंटवारा हेतु समझौता ज्ञापन पर सोमवार को हस्ताक्षर किया गया।

समझौता ज्ञापन पर सी.आर.पाटिल, सम्राट चौधरी, हेमंत सोरेन ने हस्ताक्षर किया। इसके साथ ही सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित वर्षों से लंबित विषय के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

वर्ष 1973 में हुए बाणसागर समझौते के तहत सोन नदी के कुल उपलब्ध 14.25 मिलियन एकड़ फीट जल में से उत्तर प्रदेश को 1.25 मिलियन एकड़ फीट, मध्य प्रदेश को 5.25 मिलियन एकड़ फीट तथा एकीकृत बिहार को 7.75 मिलियन एकड़ फीट जल आवंटित किया गया था।

वर्ष 2000 में झारखण्ड के अलग राज्य के रूप में गठन के पश्चात बिहार एवं झारखण्ड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे का विषय सामने आया, जो पिछले 25 वर्षों से ज्यादा समय से लंबित था।

इस महत्वपूर्ण विषय के समाधान की दिशा में 10 जुलाई 2025 को रांची में केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता एवं उप मुख्य (जल संसाधन) मंत्री विजय कुमार चौधरी की उपस्थिति में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक में बिहार को 5.75 एमएएफ तथा झारखण्ड को 2 एम एएफ सोन नदी का जल आवंटित किए जाने पर दोनों राज्यों के बीच महत्वपूर्ण सहमति बनी।

उक्त सहमति को औपचारिक रूप प्रदान करने के लिए बिहार एवं झारखण्ड के बीच हस्ताक्षरित किए जाने वाले समझौता ज्ञापन का प्रारूप केंद्रीय जल आयोग द्वारा तैयार कर दोनों राज्यों को उनकी सहमति हेतु प्रेषित किया गया था, जिस पर दोनों राज्यों द्वारा सहमति प्रदान की गई।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, झारखंड सरकार के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, अभियंता प्रमुख ब्रजेश मोहन सहित विभाग के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

इस समझौते से वर्षों से लंबित इन्द्रपुरी जलाशय परियोजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, पटना, गया एवं अरवल जिलों में सिंचाई सुविधा को स्थायित्व प्रदान किया जा सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी