औषधीय पौधों के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने को आयुष मंत्रालय और दिल्ली विवि के बीच समझौता

 


नई दिल्ली, 15 जुलाई (हि.स.)। औषधीय पौधों के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड और दिल्ली विश्वविद्यालय के भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच बुधवार को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

कर्तव्य भवन में आयोजित कार्यक्रम में आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव की उपस्थिति में यह समझौता हुआ।

इस साझेदारी के तहत औषधीय पौधों पर वैज्ञानिक अनुसंधान, नए उत्पादों का विकास, मूल्य संवर्धन, कटाई के बाद की तकनीक, पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग, तकनीक हस्तांतरण और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम किया जाएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है। पारंपरिक औषधीय ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर भारत के औषधीय पौधों की वैश्विक पहचान और बाजार क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।

भारत में औषधीय पौधों का विशाल भंडार और हर्बल चिकित्सा की प्राचीन परंपरा मौजूद है। वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित शोध और नवाचार से इस क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी तथा किसानों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेश दधिच ने कहा कि अनुसंधान आधारित नवाचार औषधीय पौधों की खेती से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने औषधीय पौधों से तैयार पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग सामग्री विकसित करने की संभावनाओं पर भी जोर दिया।

उन्होंने बताया कि उपयुक्त क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती से जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण सुधार और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

विश्वविद्यालय अपनी विशेषज्ञता का उपयोग खाद्य प्रौद्योगिकी, न्यूट्रास्यूटिकल्स, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रोसेसिंग और टिकाऊ पैकेजिंग के क्षेत्र में करेगा। इस सहयोग से औषधीय पौधों से जुड़े उत्पादों के विकास, तकनीकी हस्तांतरण और उद्यमिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो. बलराम पाणि, आयुष मंत्रालय के अधिकारी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी