कौशल प्रशिक्षण संस्थान आईआईटी और आईआईएम से कम नहीं: मोदी

 


नई दिल्ली, 09 अक्टूबर (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि कौशल प्रशिक्षण संस्थानों का महत्व किसी भी तरह से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) से कम नहीं है। उन्होंने युवाओं से बदलती तकनीक के अनुरूप लगातार नए कौशल सीखने और अपनी क्षमताओं को उन्नत करने का आह्वान किया।

मोदी ने यहां अपने आवास सात, लोक कल्याण मार्ग पर शंघाई में आयोजित 48वीं विश्व कौशल प्रतियोगिता में भाग लेने वाली भारतीय टीम के प्रतिनिधियों से बातचीत की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रतिभागियों को बधाई दी और उन्हें देश में कौशल विकास का दूत बनने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यावहारिक कौशल भी शैक्षणिक डिग्रियों जितने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने युवाओं से अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने और उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बिठाने को कहा।

मोदी ने कहा कि भारत को कुशल मानव संसाधन का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए युवाओं, सरकार और प्रशिक्षण संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रतियोगिता के दौरान प्राप्त अनुभव और सुझाव सरकार के साथ साझा करने का आग्रह किया, ताकि देश की कौशल प्रशिक्षण व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके।

प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता के दौरान नए उपकरणों, सॉफ्टवेयर, तकनीकी प्रणालियों और कार्य प्रक्रियाओं के अनुरूप खुद को ढालने के अनुभव साझा किए। उन्होंने कौशल विकास के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।

शंघाई में 22 से 27 सितंबर तक आयोजित 48वीं विश्व कौशल प्रतियोगिता में भारत 10वें स्थान पर रहा। भारतीय दल ने छह रजत पदक और उत्कृष्टता के 20 पदक जीते। प्रतियोगिता में भारत की ओर से अब तक का सबसे बड़ा 70 सदस्यीय दल 63 कौशल श्रेणियों में शामिल हुआ था।

इस बातचीत में कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार