पश्चिम बंगाल में 830 करोड़ की परियोजनाओं का शुभारंभ कर बोले पीएम- पूर्वी भारत के विकास से ही बनेगा विकसित भारत
सिंगूर, 19 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूर्वी भारत, विशेषकर पश्चिम बंगाल का तेज और समावेशी विकास अनिवार्य है। बंदरगाह, जलमार्ग, रेलवे और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के मजबूत ढांचे के बिना न तो औद्योगिक विस्तार संभव है और न ही युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन। केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल को मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेड और लॉजिस्टिक्स का वैश्विक हब बनाने के लिए बीते 11 वर्षों से निरंतर निवेश कर रही है।
प्रधानमंत्री ने रविवार को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सिंगूर में 830 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और शुभारंभ किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य में अंतर्देशीय जलमार्ग, बंदरगाह आधारित अवसंरचना, रेल कनेक्टिविटी और हरित परिवहन को मजबूत करना है। इन परियोजनाओं में हुगली नदी पर बालागढ़ में विकसित किया जा रहा विस्तारित पोर्ट गेट सिस्टम शामिल है। इस परियोजना के तहत इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट (आईडब्ल्यूटी) टर्मिनल और रोड ओवर ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी। इसके माध्यम से माल ढुलाई का एक बड़ा हिस्सा कोलकाता शहर से बालागढ़ की ओर स्थानांतरित होगा, जिससे महानगर में यातायात जाम, प्रदूषण और लॉजिस्टिक दबाव में कमी आएगी।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कोलकाता में हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक कैटामरैन का शुभारंभ भी किया। विशेष एल्युमीनियम से निर्मित इस आधुनिक नौका में 50 यात्रियों की क्षमता है और इसमें एयर-कंडीशन्ड केबिन की सुविधा उपलब्ध है। जीरो-एमिशन मोड में संचालित यह कैटामरैन हुगली नदी पर शहरी नदी परिवहन, पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा।
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, पोत परिवहन एवं जलमार्ग राज्यमंत्री शांतनु ठाकुर, केंद्रीय शिक्षा एवं पूर्वोत्तर विकास राज्यमंत्री सुकांत मजूमदार, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी, सांसद शमिक भट्टाचार्य सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए पूर्वी भारत का विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता है और पिछले दो दिनों के कार्यक्रम इसी संकल्प को और मजबूत करते हैं। उन्हें इन दो दिनों में पश्चिम बंगाल से जुड़े सैकड़ों करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण करने का अवसर मिला है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 24 घंटे पश्चिम बंगाल की रेल कनेक्टिविटी के लिए ऐतिहासिक रहे हैं। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन राज्य से शुरू हुई है और बंगाल को लगभग आधा दर्जन नई अमृत भारत ट्रेनें मिली हैं। रविवार को तीन और नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का शुभारंभ किया गया है, जिनमें से एक ट्रेन काशी से बंगाल की कनेक्टिविटी को और सशक्त करेगी। इसके अलावा दिल्ली और तमिलनाडु के लिए भी अमृत भारत एक्सप्रेस शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि शायद पिछले 100 वर्षों में 24 घंटे के भीतर रेलवे क्षेत्र में इतना व्यापक कार्य कभी नहीं हुआ होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जलमार्गों की अपार संभावनाएं हैं और केंद्र सरकार इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। बंदरगाहों और नदी जलमार्गों से जुड़ी अवसंरचना के विकास के लिए केंद्र सरकार आवश्यक सहायता प्रदान कर रही है। कुछ ही समय पहले बंदरगाह और अंतर्देशीय जलमार्ग से जुड़े कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया है, जो राज्य और देश दोनों के विकास के लिए निर्णायक सिद्ध होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बंदरगाह और उससे जुड़े इको-सिस्टम वे मजबूत स्तंभ हैं, जिनके आधार पर पश्चिम बंगाल को मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेड और लॉजिस्टिक्स का वैश्विक केंद्र बनाया जा सकता है। जितना अधिक बल बंदरगाह आधारित विकास पर दिया जाएगा, उतने ही अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बीते 11 वर्षों में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के विस्तार पर बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है और सागरमाला योजना के तहत इसकी कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए सड़क अवसंरचना भी विकसित की गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का परिणाम है कि कोलकाता पोर्ट ने बीते वर्ष कार्गो हैंडलिंग के नए रिकॉर्ड बनाए हैं। बालागढ़ में विकसित किया जा रहा विस्तारित पोर्ट गेट सिस्टम हुगली और आसपास के क्षेत्रों के लिए विकास के नए द्वार खोलेगा। इससे कोलकाता शहर पर ट्रैफिक और लॉजिस्टिक्स का दबाव कम होगा और माल ढुलाई अधिक सुगम बनेगी।
उन्होंने कहा कि गंगा नदी पर विकसित जलमार्ग के माध्यम से कार्गो हैंडलिंग में और वृद्धि होगी और यह संपूर्ण अवसंरचना हुगली क्षेत्र को वेयरहाउसिंग और ट्रेनिंग का प्रमुख केंद्र बनाने में सहायक होगी। इससे सैकड़ों करोड़ रुपये का नया निवेश आएगा और हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। छोटे व्यापारियों, परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों और किसानों को भी इससे सीधा लाभ होगा क्योंकि उन्हें अपने उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और ग्रीन मोबिलिटी पर विशेष जोर दे रहा है। सीमलेस ट्रांसपोर्टेशन को संभव बनाने के लिए नदी जलमार्ग, सड़क, रेलवे और हवाई अड्डों को आपस में जोड़ा जा रहा है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत और परिवहन में लगने वाले समय, दोनों में उल्लेखनीय कमी आ रही है, जो भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धा को और मजबूत करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर