अशोक सिंहल का जीवन समाज और राष्ट्र के लिए समर्पण का उदाहरण : मोदी

 


नई दिल्ली, 28 सितंबर (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंहल को उनकी जन्मशती पर याद करते हुए कहा कि उनका जीवन समाज, संस्कृति और राष्ट्र के लिए समर्पित रहा। उन्होंने सिंहल के संगठनात्मक कौशल, सामाजिक समरसता के प्रति प्रतिबद्धता और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका को भी स्मरण किया।

प्रधानमंत्री ने एक लेख में कहा कि सिंहल का जीवन इस भावना का उदाहरण था कि व्यक्ति को अपनी उपलब्धियों से अधिक लोक कल्याण के लिए समर्पित जीवन को महत्व देना चाहिए। उन्होंने एक सुभाषित का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह वृक्ष अपने फल और नदी अपना जल अपने लिए नहीं रखते, उसी तरह संत स्वभाव के लोग दूसरों की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं।

मोदी ने कहा कि 27 सितंबर से अशोक सिंहल की जन्मशती वर्ष की शुरुआत हुई है। उन्होंने सिंहल के साथ अपने लंबे जुड़ाव और व्यक्तिगत संस्मरण साझा करते हुए 1981 का एक प्रसंग याद किया, जब उन्हें सिंहल का हाथ से लिखा पत्र मिला था। प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंहल देश के दूर-दराज के क्षेत्रों की यात्राएं करते थे और वंचित तथा अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के लिए लगातार काम करने पर विचार करते रहते थे। वर्ष 2001 के कच्छ भूकंप के बाद उनके साथ का अनुभव भी उन्होंने याद किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संपन्न परिवार से आने के बावजूद सिंहल ने अलग मार्ग चुना और समाज तथा संस्कृति के लिए अपना जीवन समर्पित किया। प्रयागराज और काशी से उनके जुड़ाव का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि सिंहल का आध्यात्मिक साधना, शिक्षा, विशेषकर वैदिक शिक्षा और संगीत से गहरा लगाव था। उन्होंने बीएचयू से शिक्षा प्राप्त की थी और एकल विद्यालय की पहल से भी जुड़े थे।

मोदी ने सिंहल के संगठनात्मक कौशल का उल्लेख करते हुए 1993 में अमेरिका में आयोजित स्वामी विवेकानंद के शिकागो संबोधन की शताब्दी से जुड़े सम्मेलन और वर्ष 2000 में त्रिनिदाद एवं टोबैगो के पोर्ट ऑफ स्पेन में हुए विश्व हिंदू सम्मेलन के प्रसंग साझा किए। उन्होंने कहा कि सिंहल अपने सहयोगियों के प्रति स्नेह रखते थे और उनका प्रोत्साहन कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर देता था।

राम जन्मभूमि आंदोलन में सिंहल की भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 1991 की बोट क्लब रैली में उनका संबोधन और आंदोलन के दौरान घायल अवस्था की तस्वीर लंबे समय तक स्मरण में रही। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के पीछे सिंहल जैसी विभूतियों का समर्पण रहा। मोदी ने सामाजिक समरसता पर सिंहल के जोर का भी उल्लेख किया और कहा कि वह समाज में भेदभाव के खिलाफ थे तथा सभी को समान गरिमा और सम्मान देने के पक्षधर थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंहल ने राष्ट्र-निर्माण के साथ शिक्षा और संगीत को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने युवाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित किया और स्वयं भी अच्छा गाते थे। मोदी ने कहा कि सिंहल के आदर्शों से आज भी प्रेरणा मिलती है और उनकी जन्मशती के अवसर पर युवाओं को उनके जीवन और कार्यों से परिचित कराने का प्रयास होना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार