छग सरकार को नई जेलों के निर्माण में मॉडल जेल मैनुअल 2016 के नियमों का सख्ती से पालन करने निर्देश
रायपुर/बिलासपुर, 24 मार्च (हि.स.)। छत्तीसगढ़ की जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की समस्या (ओवरक्राउडिंग) और खराब स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उच्च न्यायालय ने गंभीर चिंता जताई है। बिलासपुर उच्च न्यायालय ने 5 मई तक वर्तमान जेलों की विस्तृत रिपोर्ट डीजी (जेल) से मांगी गई है।
इसमें डीजी, जेल को नया शपथपत्र देकर बताना होगा कि वर्तमान में चल रही जेलों की क्षमता कितनी है और क्या वहां कैदियों को मॉडल मैनुअल के हिसाब से जगह मिल रही है या नहीं। जेल निर्माण में 11 बिंदुओं के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और समय-समय पर निरीक्षण करने को कहा गया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के जारी मॉडल जेल मैनुअल 2016 के आधार पर राज्य सरकार ने नई जेल नियमावली तैयार की है। राज्य सरकार अब जेलों में ‘मॉडल जेल मैनुअल 2016’ लागू करने की तैयारी में है, जिससे कैदियों को बेहतर सुविधाएं और मानवीय व्यवहार सुनिश्चित किया जा सके। इसका उद्देश्य जेलों को सिर्फ सजा देने की जगह न रखकर उन्हें सुधार गृह के रूप में विकसित करना है, जहां कैदियों के पुनर्वास और सुधार पर जोर दिया जाए।
नई नियमावली के तहत कई अहम बदलाव किए गए हैं। जेलों में जाति-आधारित वर्गीकरण को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। महिला कैदियों, खासकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के साथ रहने वाली माताओं के लिए विशेष स्वास्थ्य और स्वच्छता सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। इसके अलावा, एकांत कारावास जैसी कठोर व्यवस्थाओं पर रोक लगाई गई है। बंदियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण और विचाराधीन कैदियों को निशुल्क कानूनी सहायता देने की व्यवस्था भी की जा रही है।
बिलासपुर उच्च न्यायालय चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने जेलों में जरूरी सुधार और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए राज्य शासन को नई जेलों के निर्माण में मॉडल जेल मैनुअल 2016 के नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
डीजी जेल हिमांशु गुप्ता के अनुसार बिलासपुर के बैमा नगई में नई जेल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता की रिपोर्ट के अनुसार, इस जेल का निर्माण मॉडल जेल मैनुअल 2016 के मानक मापदंडों से भी उच्च स्तर पर किया जा रहा है। निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए 4 सदस्यीय कमेटी भी गठित की गई है। इसके साथ ही बताया गया कि बेमेतरा में 200 कैदियों की क्षमता वाली एक नई ओपन जेल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यह निर्माण पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया है।
उल्लेखनीय है कि उच्चतम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 18 मई तक महिला जेलों की संख्या और वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देने को कहा है। इसमें महिला कैदियों के साथ रहने वाले बच्चों की शिक्षा और उनके समग्र विकास से जुड़े उपायों का भी विवरण शामिल होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / गायत्री प्रसाद धीवर