महाराष्ट्र के नासिक में राष्ट्रपति ने सिंहस्थ धर्मध्वज फहरा कर नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ पर्व का किया शुभारंभ

 


मुंबई, 31 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र के नासिक के रामतीर्थ में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को पवित्र गोदावरी नदी के तट पर वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और साधु-संतों की उपस्थिति के बीच सिंहस्थ धर्मध्वज फहरा कर नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ पर्व का शुभारंभ किया।

इस ऐतिहासिक समारोह के साथ आज से नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ पर्व की तैयारियों का विधिवत शुभारंभ हो गया है। बारह वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाले इस महापर्व के स्वागत में पूरा नासिक भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आया।

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार इस समारोह की शुरुआत पारंपरिक वैदिक अनुष्ठानों, यज्ञ-हवन और मंत्रोच्चार से हुई। राष्ट्रपति मुर्मु ने विधिवत गोदावरी पूजन और धर्मध्वज पूजन किया। इसके बाद पुजारियों के मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने धर्मध्वज फहराया। ध्वजारोहण के साथ गूंजे शंखनाद और मंगल वाद्यों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनीता ताई अजीत पवार, केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव, पालकमंत्री गिरीश महाजन, मंत्री छगन भुजबल, गुलाबराव पाटिल, दादाजी भुसे, जयकुमार रावल, संजय सावकारे, नरहरि जिरवाल और नितेश राणे सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। विभिन्न अखाड़ों के महंतों, धर्माचार्यों और साधु-संतों की उपस्थिति ने समारोह की आध्यात्मिक गरिमा बढ़ाई।

जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्रपुरी महाराज, श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज, माधवाचार्य महाराज, राजेंद्रदास महाराज सहित अनेक संतों ने इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। धार्मिक अनुष्ठान पुरोहित संघ के सतीश शुक्ला और अध्यक्ष चंद्रशेखर पंचाक्षरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुए।

धर्मध्वज के प्रतीकों का विशेष महत्व

श्री गंगा-गोदावरी धर्मध्वज पर अंकित प्रत्येक प्रतीक का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। ध्वज पर बना अमृत कुंभ अमरता, मोक्ष और देवी शक्ति का प्रतीक है। ओंकार चिह्न ब्रह्मांड, सकारात्मकता और सर्वव्यापकता को दर्शाता है, जबकि 'श्री' अक्षर विजय एवं शुभता का प्रतीक माना जाता है। ध्वज पर लगी 12 रेशमी लटकन सामाजिक एकता और सामूहिक शक्ति का संदेश देती हैं। एक घंटा और तीन घंटियां ध्वनि तथा ब्रह्मनाद का प्रतीक हैं। ध्वज के दूसरी ओर गोदावरी के वाहन मगरमच्छ के साथ सूर्य और चंद्रमा के शुभ चिह्न अंकित हैं।

धर्मध्वजारोहण के साथ ही आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों को भी नई दिशा मिली है। नासिक और त्र्यंबकेश्वर में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन बुनियादी ढांचे, स्वच्छता, यातायात, सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं की व्यापक योजना पर काम कर रहा है।

समारोह में विधायक सुहास कांडे, राहुल ढिकले, देवयानी फरांदे सहित अन्य जनप्रतिनिधि, विभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम, सिंहस्थ कुंभ मेला प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह, मनपा आयुक्त मनीषा खत्री, जिलाधिकारी आयुष प्रसाद तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

गोदावरी तट पर फहराया गया धर्मध्वज केवल कुंभ पर्व के आगमन का संकेत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत, संत परंपरा और करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक है। इस समारोह ने नासिक की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को नई गरिमा प्रदान करते हुए आगामी सिंहस्थ महापर्व के लिए उत्साह का वातावरण तैयार किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव