एमपीएससी पेपर लीक मामले में तीन अधिकारियों समेत 6 गिरफ्तार

 

मुंबई, 26 अगस्त (हि.स.)। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक मामले में क्राइम ब्रांच ने बुधवार को छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में एमपीएससी के तीन अधिकारी, एक कर्मचारी, एक परीक्षार्थी के रिश्तेदार और पेपरलीक मामले का कथित मास्टरमाइंड शामिल है। इस मामले की छानबीन मुंबई क्राइम ब्रांच पुलिस कर रही है।

जांच में शामिल पुलिस अधिकारी ने आज बताया कि इस मामले में एमपीएससी के अपर सचिव अभिजीत लेंडवे को भी गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा असिस्टेंट सेल अधिकारी गोपाल मराठे और विश्ववर नकाटे को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। परीक्षार्थी ऋतुजा पाटिल के पिता अमृत पाटिल तथा पेपर लीक के कथित मास्टरमाइंड प्रवीण पाटिल को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं, पेपर लीक का आरोप लगाने वाले गौरव पाटिल की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

ड्रग इंस्पेक्टर पद की परीक्षा का प्रश्नपत्र 20 मार्च 2026 को कुछ परीक्षार्थियों तक पहुंच गया था। इसके बाद महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग ने परीक्षा प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय लिया। आरोप है कि पेपर लीक के पीछे निजी संबंधों से जुड़ा विवाद भी एक कारण रहा।

उल्लेखनीय है कि एमपीएससी ने 22 मार्च 2026 को राज्य के छह संभागीय मुख्यालयों पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर, ग्रुप-बी पद के लिए ऑफलाइन परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के बाद 12 जून को परिणाम घोषित किए गए, जिसमें 506 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए पात्र घोषित किया गया। इसके बाद 1 से 22 जुलाई के बीच 488 उम्मीदवारों के साक्षात्कार आयोजित किए गए। साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र और अपात्र उम्मीदवारों की अस्थायी मेरिट सूची भी जारी की गई थी।

फाइनल रिजल्ट का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के बीच प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आने के बाद पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठ गए है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एमपीएसी ने परीक्षा रद्द कर दी। अब दोबारा परीक्षा की तारीख जल्द घोषित किए जाने की संभावना है।

इस मामले को लेकर विधायक रोहित पवार और विभिन्न छात्र संगठनों ने लगातार शिकायत और फॉलोअप के बाद जांच मुंबई पुलिस को सौंपी गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र किस स्तर पर लीक हुआ और इसके पीछे मुख्य साजिशकर्ता कौन है। परीक्षा रद्द होने से उम्मीदवारों को फिलहाल राहत मिली है लेकिन वे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं। उम्मीदवारों का कहना है कि पेपर लीक के पूरे नेटवर्क का खुलासा होने के बाद ही परीक्षा प्रक्रिया में उनका विश्वास बहाल हो सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव