(अपडेट) भोपाल पहुंचे ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि मौलाना इलाही, बोले- भारत को गहराई से समझते हैं खामेनेई

 


भोपाल, 26 अप्रैल (हि.स.)। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के प्रतिनिधि मौलाना डॉ अब्दुल मजीद हकीम इलाही रविवार को मध्य प्रदेश के राजधानी भोपाल पहुंचे। वे यहां आयोजित इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन जलसे में शामिल हुए और “उम्मत की एकता” का संदेश देते हुए आपसी मतभेद भुलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खामेनेई भारत को गहराई से समझते हैं।

कार्यक्रम में मौलाना इलाही ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की भारत के प्रति गहरी रुचि और ज्ञान का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आयतुल्लाह खामेनेई ने भारत के इतिहास, संस्कृति और समाज को समझने के लिए 22 से अधिक किताबों का अध्ययन किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने कई मौकों पर अपनी तकरीरों में भारत और भारतीयों के इतिहास, सभ्यता और बौद्धिक परंपरा का जिक्र किया है।

मौलाना इलाही ने कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई विशेष रूप से जवाहर लाल नेहरू की प्रसिद्ध पुस्तक द डिस्कवर ऑफ इंडिया से बेहद प्रभावित रहे हैं। उन्होंने छात्रों को कई बार इस पुस्तक का अध्ययन करने की सलाह दी और इसे एक मोजजे जैसी रचना बताया। उन्होंने कहा कि जिस परिस्थिति में नेहरू ने जेल में रहते हुए, बिना पर्याप्त संसाधनों के यह विस्तृत और गहन पुस्तक लिखी, वह अपने आप में अद्वितीय उदाहरण है। खुद आयतुल्लाह खामेनेई ने इस पुस्तक को दो बार पढ़ने की बात कही थी।

मौलाना इलाही ने आगे बताया कि आयतुल्लाह खामेनेई को भारतीय लेखकों, बुद्धिजीवियों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के बारे में गहरी जानकारी थी। जब भी भारत से कोई प्रतिनिधिमंडल या व्यक्ति उनसे मिलता, तो वे भारतीय साहित्यकारों और लेखकों के बारे में विस्तार से चर्चा करते और नई पुस्तकों के बारे में भी पूछताछ करते थे। यह उनकी बौद्धिक जिज्ञासा और भारत के प्रति लगाव को दर्शाता है।

मौलाना इलाही ने एक रोचक प्रसंग में भारतीय प्रधानमंत्री से मुलाकात का उल्लेख करते हुए बताया कि जब भारत के एक पूर्व प्रधानमंत्री उनसे मिलने गए। तो तय समय 15 मिनट का था, लेकिन बातचीत करीब डेढ़ घंटे तक चली। इस दौरान आयतुल्लाह खामेनेई ने भारत के इतिहास, संस्कृति, दर्शन और सभ्यता पर गहन चर्चा की। इतना ही नहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री के पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनके पूर्वजों के बारे में भी जानकारी साझा की, जिसे सुनकर प्रधानमंत्री भी आश्चर्यचकित रह गए और कहा कि इतनी जानकारी तो उन्हें स्वयं भी नहीं थी।

मौलाना इलाही ने कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई हमेशा भारत और ईरान के संबंधों को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों के रिश्ते 5000 साल से भी अधिक पुराने हैं, जो केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, शैक्षणिक, दार्शनिक और सभ्यतागत आधार पर जुड़े हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संबंध पहले से ही मजबूत हैं, लेकिन समय के साथ इन्हें और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है।

आपसी संबंध मजबूत करने का आह्वान अपने संबोधन के अंत में मौलाना इलाही ने भारत और ईरान के बीच आपसी समझ, सहयोग और भाईचारे को और मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझा विरासत और सांस्कृतिक जुड़ाव दुनिया के लिए एक मिसाल है, जिसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।

गौरतलब है कि मुस्लिम समाज की एकता और भाईचारे को मजबूत करने के उद्देश्य से भोपाल के कोहेफिजा स्थित एमआईजी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में ‘इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन जलसा’ का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग तिरंगा लेकर पहुंचे, जिससे आयोजन स्थल पर एकजुटता का माहौल देखने को मिला। वहीं कुछ छोटे बच्चे फिलिस्तीन झंडे छपी हुई टी-शर्ट में नजर आए, जिसकी दूसरी तरफ ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई का फोटो लगा हुआ था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ईरान के सुप्रीम लीडर के के प्रतिनिधि मौलाना डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही के आगमन के साथ ही लोगों का उत्साह और बढ़ गया था।

जलसे में एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष मोहसिन अली खान ने अपने संबोधन में कहा कि आज समाज के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जुल्म के खिलाफ किस तरह खड़ा हुआ जाए। उन्होंने कहा कि इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, अगर जुल्म को ताकत से नहीं रोक सकते तो कम से कम जुबान से उसका विरोध करना चाहिए और यदि वह भी संभव न हो तो दिल में उसे गलत मानना जरूरी है। उन्होंने अफसोस जताया कि आज कुछ लोग जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने वालों की ही आलोचना करने लगते हैं और सोशल मीडिया पर बिना सच्चाई जाने भ्रामक बातें फैलाते हैं, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

कार्यक्रम में मुफ्ती डॉ. इरफान आलम साहब कासमी, रणवीर सिंह वजीर (प्रदेश उपाध्यक्ष, अल्पसंख्यक विभाग), राजकुमार वर्मा (सदस्य, कांग्रेस कमेटी), फतेहगढ़ इमामबाड़ा के इमाम मौलाना राजीउल हसन साहब और शाहजहानाबाद गुरुद्वारे के ग्रंथी अरिजीत सिंह भी शामिल हुए। विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को सांप्रदायिक सौहार्द और एकता का संदेश दिया। शिया समुदाय के इमाम सहित अन्य धर्मगुरु भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

-----------------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर