जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन

 


नई दिल्ली, 30 मार्च (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में भाग लेकर 51 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल विवाह का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में समानता, सम्मान और सहयोग की भावना को सशक्त करने का एक प्रेरणादायक प्रयास है।

इस आयोजन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समारोह में बेटियों को वह सम्मान दिया गया है, जो हर परिवार अपनी बेटी के विवाह में देना चाहता है। समाज के सक्षम वर्ग और जरूरतमंद परिवारों को जोड़ने का यह प्रयास सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह आयोजन केवल विवाह नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके उज्ज्वल भविष्य की सशक्त पहल है। इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ-साथ बेटियों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करते हैं। दिल्ली सरकार ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करती रहेगी, जो समाज में समावेशिता, संवेदनशीलता और समान अवसर को बढ़ावा दें।

आध्यात्मिक गुरु जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज के सानिध्य में इस पावन सामूहिक विवाह समारोह में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उनकी धर्मपत्नी सविता कोविंद, केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक कन्या को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से व्यापक और बहुआयामी सुविधाएं प्रदान की गईं। नई जीवन-यात्रा की सशक्त शुरुआत के लिए हर कन्या को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई ताकि वह अपने विवाह के बाद आत्मनिर्भर जीवन की ओर मजबूती से कदम बढ़ा सके। साथ ही विवाह के बाद उनके कौशल विकास और रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने के लिए 1 लाख रुपये तक का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा।

बेटियों की शिक्षा निरंतर जारी रहे, इस सोच के साथ प्रत्येक कन्या को लैपटॉप और ई-शिक्षा सामग्री प्रदान की गई, जिससे वे डिजिटल माध्यमों से अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ा सकें। स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हर कन्या को 7.50 लाख रुपये तक का तीन वर्षों का स्वास्थ्य बीमा भी दिया गया है, जिसकी पूरी प्रीमियम राशि संस्था द्वारा वहन की जा रही है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी विशेष सावधानी बरती गई और यह सुनिश्चित किया गया कि वर-पक्ष की आपराधिक पृष्ठभूमि की पूरी तरह जांच हो।

कार्यक्रम के भावनात्मक और सामाजिक महत्व को और अधिक सशक्त बनाते हुए इस अवसर पर 51 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने स्वयं बेटियों का कन्यादान और पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराया, जो समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बना।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव