भारतीय पर्यटन बाजार में मलेशिया की पकड़ मजबूत, 2027 तक जारी रहेगा ‘विजिट मलेशिया’ अभियान

 


नई दिल्ली, 19 अगस्त (हि.स.)। मलेशिया पर्यटन विभाग ने 12 से 20 अगस्त के बीच चेन्नई, मुंबई और नई दिल्ली में अपनी बिक्री मिशन श्रृंखला के दूसरे चरण का आयोजन किया। इसका उद्देश्य भारतीय पर्यटन कारोबारियों के साथ संबंध मजबूत करना, नए कारोबारी अवसर तलाशना और भारतीय यात्रियों के बीच मलेशिया को पसंदीदा पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करना है।

इस बिक्री मिशन में मलेशिया के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े 47 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें यात्रा संचालक, होटल कारोबारी और विमानन कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान दोनों देशों के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच कारोबारी बैठकें, संपर्क और विचार-विमर्श हुआ। साथ ही भारतीय यात्रियों के लिए नए यात्रा पैकेज और पर्यटन अवसर विकसित करने पर भी चर्चा की गई।

इस बिक्री मिशन का नेतृत्व मलेशिया पर्यटन विभाग के महानिदेशक मोहम्मद अमीरुल रिजाल अब्दुल रहीम ने किया। कार्यक्रम का आयोजन बाटिक एयर के सहयोग से किया गया। इसे मलेशिया को प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग की अहम पहल माना जा रहा है।

मोहम्मद अमीरुल रिजाल अब्दुल रहीम ने कहा कि भारत मलेशिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ते विदेशी पर्यटन बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय यात्रा माहौल का कुछ क्षेत्रों में पर्यटन पर असर पड़ सकता है, लेकिन मलेशिया भारतीय बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि भारतीय यात्रियों के बीच मलेशिया को प्रमुख पर्यटन विकल्प बनाए रखने के लिए लगातार और लक्षित प्रचार अभियान चलाए जाएंगे। इन प्रयासों को विमानन कंपनियों और यात्रा कारोबार से जुड़े साझेदारों के सहयोग से और मजबूत किया जाएगा।

मोहम्मद अमीरुल रिजाल अब्दुल रहीम ने कहा कि इस बिक्री मिशन का मुख्य उद्देश्य कारोबारी साझेदारियों को मजबूत करना, नए व्यावसायिक अवसर पैदा करना और भारतीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप अधिक आकर्षक एवं प्रतिस्पर्धी यात्रा पैकेज तैयार करने के लिए पर्यटन क्षेत्र से जुड़े साझेदारों को प्रोत्साहित करना है।

मलेशिया भारतीय पर्यटकों को केवल कुआलालंपुर और जेंटिंग हाईलैंड्स तक सीमित यात्रा कार्यक्रमों से आगे बढ़कर देश के अन्य पर्यटन स्थलों की सैर के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है।

मलेशिया पर्यटन विभाग के अनुसार, सारावाक, लैंगकावी, पेनांग, जोहोर और सबाह जैसे पर्यटन स्थलों में भारतीय यात्रियों के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। इन स्थानों पर प्राकृतिक सुंदरता, रोमांचक गतिविधियां, समुद्री द्वीपों की सैर, सांस्कृतिक विरासत, खान-पान, खरीदारी, पारिवारिक मनोरंजन, व्यावसायिक आयोजनों और गंतव्य विवाह जैसे कई अनुभव उपलब्ध हैं।

इन पर्यटन स्थलों का भारत में व्यापक प्रचार किए जाने से यात्रियों के मलेशिया में अधिक समय तक ठहरने, अधिक खर्च करने और दोबारा यात्रा करने को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

भारत मलेशिया के प्रमुख विदेशी पर्यटन बाजारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच हर सप्ताह 190 से अधिक सीधी उड़ानें संचालित होती हैं। इन उड़ानों में हर सप्ताह 37 हजार से अधिक सीटें उपलब्ध हैं। मजबूत हवाई संपर्क के कारण भारतीय यात्रियों के लिए मलेशिया की यात्रा आसान हो गई है।

भारतीय पर्यटन बाजार में मलेशिया का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। दिसंबर 2023 में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा शुरू किए जाने के बाद मलेशिया पहुंचने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।

वर्ष 2025 में भारत से 15 लाख से अधिक पर्यटक मलेशिया पहुंचे। इसके साथ ही भारत मलेशिया के शीर्ष पांच विदेशी पर्यटन बाजारों में शामिल हो गया। इस सूची में सिंगापुर, थाईलैंड, इंडोनेशिया और चीन भी शामिल हैं। मलेशिया को उम्मीद है कि भारतीय पर्यटकों की यह सकारात्मक रुचि वर्ष 2026 और इसके बाद भी जारी रहेगी।

मलेशिया ने ‘विजिट मलेशिया 2026’ अभियान को वर्ष 2027 तक बढ़ा दिया है। अभियान की अवधि बढ़ाए जाने के साथ भारत में प्रचार गतिविधियों को भी और तेज किया जाएगा।

इसका उद्देश्य 2026 के दौरान हासिल पर्यटन वृद्धि को बनाए रखना और आने वाले वर्षों के लिए भारतीय पर्यटकों की मजबूत संख्या सुनिश्चित करना है। अभियान के विस्तार से पर्यटन उद्योग के साथ सहयोग बढ़ाने, मलेशिया के विभिन्न पर्यटन स्थलों की पहचान मजबूत करने और भारतीय बाजार में भरोसा कायम रखने के लिए नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

मलेशिया पर्यटन विभाग के मुताबिक, ‘विजिट मलेशिया 2026’ अभियान के तहत देश की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध पर्यटन आकर्षणों को दुनिया के सामने पेश किया जा रहा है। साथ ही टिकाऊ पर्यटन विकास, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के लिए दीर्घकालिक लाभ पर भी जोर दिया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी