फुटबॉल खिलाड़ी मेसी के कार्यक्रम को लेकर विवाद पर फिर गरमाई सियासत, शतद्रु दत्ता ने सौरव गांगुली के बयान पर दिया जवाब
कोलकाता, 28 मई (हि. स.)। अर्जेंटीना के फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के कार्यक्रम को लेकर हुए विवाद पर एक बार फिर राजनीतिक और खेल जगत में चर्चा तेज हो गई है। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक शतद्रु दत्ता ने गुरुवार को पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान और बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सौरव गांगुली के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उस समय की परिस्थितियों को शायद अब सही तरीके से याद नहीं रखा गया है।
शतद्रु दत्ता का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले कार्यक्रम को ईडन गार्डन्स में आयोजित करने की कोशिश की थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय क्रिकेट संघ के चुनाव चल रहे थे, जिसके कारण उन्हें अनुमति नहीं मिल सकी।
उन्होंने कहा, “दादा शायद भूल गए हैं कि मैं सबसे पहले सीएबी के पास ही गया था। लेकिन उस समय चुनाव होने की वजह से मुझे अनुमति नहीं दी जा सकी। मैंने 25 दिन तक इंतजार किया था। इसके बाद मजबूर होकर युवभारती क्रीड़ांगन में कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला लेना पड़ा।”
दरअसल, हाल ही में सौरव गांगुली ने कहा था कि यदि कार्यक्रम ईडन गार्डन्स में होता तो अव्यवस्था की स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने शतद्रु को ईडन में कार्यक्रम करने की सलाह दी थी, लेकिन अंतिम फैसला आयोजकों का था।
मेसी कार्यक्रम के दौरान हुई भारी अव्यवस्था के बाद पूरे मामले ने काफी विवाद खड़ा कर दिया था। इस घटना के बाद तत्कालीन मंत्री अरूप विश्वास को पद छोड़ना पड़ा था, जबकि आयोजक शतद्रु दत्ता को गिरफ्तार भी किया गया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब शतद्रु दत्ता ने इस मामले में खुलकर बयान दिया है। उन्होंने पूर्व मंत्री अरूप विश्वास, जुई विश्वास, आईएएस अधिकारी शांतनु बसु और तत्कालीन डीजीपी राजीव कुमार सहित कई लोगों के खिलाफ विधाननगर दक्षिण थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
शतद्रु का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों की गलतियों के कारण पूरा कार्यक्रम बिगड़ गया। उन्होंने दावा किया कि कई लोग बिना अनुमति के मैदान में प्रवेश कर गए थे, जिसकी वजह से भारी अव्यवस्था और अफरातफरी की स्थिति बनी।
इस मामले को लेकर अब एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बहस शुरू हो गई है। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर उस समय सुरक्षा और आयोजन प्रबंधन में चूक कहां हुई थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय