पीओजेके में बढ़ा पाकिस्तानी फौज का दमन, उग्र हुए प्रदर्शन, 20 की मौत, दर्जनों घायल

 

श्रीनगर 29 जुलाई (हि.स.) पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में तथाकथित क्षेत्रीय चुनावों का बड़े पैमाने पर बहिष्कार और सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कठोर दमनात्मक कार्रवाई में कम से कम 20 मौतें होने और 33 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पीओजेके के रावलाकोट, मुजफ्फराबाद और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में प्रशासन किसी भी नए प्रदर्शन या सार्वजनिक जमावड़े को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती लगातार बढ़ा रहा है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कड़े सुरक्षा इंतजामों के बावजूद आने वाले दिनों में नए विरोध प्रदर्शन, बंद और सुरक्षा बलों के साथ टकराव की तेज होने की आशंका बढ़ रही है।

भारत सरकार इन घटनाओं पर पैनी नजर रखे हुए है। सूत्रों का कहना है कि यह बहिष्कार राजनीतिक प्रक्रिया में जनता के घटते विश्वास और प्रशासन/व्यवस्था के प्रति निरंतर असंतोष का प्रमाण है। पाकिस्तानी शासन पीओजेके भर में संचार ब्लैकआउट और सेवाओं को निलंबित करना जारी रखे हुए है, जिससे नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का हनन हो रहा है और क्रूर दमन को जांच की मांग एक तरह से ठुकरायी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार रावलाकोट से मुज़फ़्फ़राबाद तक संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के लंबे मार्च के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उन पर घातक बल का प्रयोग किया जिसमें कम से कम 20 नागरिकों की मौत हो गई और 33 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हो गए। मृतकों में जेएएसी केंद्रीय समिति के सदस्य उमर नज़ीर के भाई उस्मान नज़ीर भी शामिल हैं।

जेएएसी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से गैरकानूनी हत्याओं की तत्काल स्वतंत्र जांच, घातक बल के प्रयोग को तुरंत रोकने, नागरिकों की सुरक्षा, घायलों को चिकित्सा सहायता और बल के किसी भी अत्यधिक या गैरकानूनी प्रयोग के लिए जवाबदेही तय करने की अपील की है।

स्वतंत्र रिपोर्टों के अनुसार मीरपुर डिवीजन में क्षेत्रीय चुनावों के पहले चरण में अनुमानित मतदान 10 प्रतिशत से कम रहा। यह आधिकारिक आंकड़ों (45 प्रतिशत) के बिल्कुल विपरीत है। जेएएसी के बहिष्कार के आह्वान के समर्थन में प्रमुख शहरों में पूर्ण बंद रहा।

जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय छात्र संघ (जेकेएनएसएफ) जैसे संगठनों ने इस दमन की खुले तौर पर निंदा की है। जेकेएनएसएफ ने छात्र संगठनों, ट्रेड यूनियनों, समाजवादी समूहों और मानवाधिकार संगठनों से पीओजेके के लोगों के साथ एकजुटता दिखाने का आग्रह किया है।--------

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया