देश में द्वेष के खिलाफ शांति का संदेश देगी ‘जनता जोड़ो जागृति यात्रा’: बी.के. हरिप्रसाद

 




शिवमोग्गा, 30 सितंबर (हि.स.)। देश में द्वेष और ईर्ष्या के माहौल के खिलाफ शांति और सद्भाव का संदेश देने के उद्देश्य से ‘जनता जोड़ो जागृति यात्रा’ आयोजित की गई है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने बुधवार को शिवमोग्गा जिले के शिकारीपुर में आयोजित यात्रा के उद्घाटन सत्र में यह बात कही।

हरिप्रसाद ने कहा कि शिकारीपुर में आयोजित सभा राहुल गांधी की लोकप्रियता का प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह ‘भारत जोड़ो यात्रा’ नहीं है। महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा के दौरान करीब 300 किलोमीटर की यात्रा की थी। इसी तरह राहुल गांधी ने देश में द्वेष और ईर्ष्या के माहौल के खिलाफ शांति और सद्भाव का संदेश देते हुए लंबी यात्रा की थी। उस यात्रा के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर राहुल गांधी की भावना के अनुरूप ‘जनता जोड़ो जागृति यात्रा’ आयोजित की गई है।

उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न प्रमुख धर्मों के लोग भारतीय के रूप में एक साथ रहते आए हैं। हालांकि, भाजपा पर द्वेष का माहौल पैदा करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कुवेम्पु के विश्वमानव संदेश को याद किया।

हरिप्रसाद ने कुवेम्पु की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को मंदिर, चर्च और मस्जिद की सीमाओं से बाहर निकलकर अंधविश्वास को दूर करने, गरीबी को खत्म करने और विज्ञान की रोशनी अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक को सभी समुदायों के लिए शांति का बगीचा बनाए रखना होगा।

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना

हरिप्रसाद ने कहा कि देश की आजादी के लिए अनेक लोगों ने त्याग और बलिदान दिया। ऐसे महान लोगों की धरती पर आज भ्रष्टाचार और द्वेष का माहौल पैदा होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि शिवमोग्गा वह जिला है, जहां ‘जिसने जमीन जोती, जमीन उसी की’ के नारे के साथ कागोडु आंदोलन शुरू हुआ था। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे जिले की परंपरा को बचाने के बजाय भाजपा नेता क्या कर रहे हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ पदयात्रा करने वाले नेताओं पर भी निशाना साधते हुए हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि 18 करोड़ रुपये आरटीजीएस के जरिए रिश्वत के रूप में लेने वालों का भ्रष्टाचार के खिलाफ पदयात्रा करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने भाजपा नेताओं पर अपने पिता के नाम का राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया। नोटबंदी के दौरान 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला को बैंक के सामने खड़ा रहने की स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने बी.एस. येदियुरप्पा को जेल भेजा, उसी पार्टी ने बाद में उनके बेटे को प्रदेश अध्यक्ष बनाया।

हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि 2008 में येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री बनने के समय उनके पास विधायकों का पर्याप्त समर्थन नहीं था। उस समय ‘ऑपरेशन कमल’ के जरिए विधायकों की खरीद-फरोख्त कर राज्य की प्रतिष्ठा और कन्नड़ लोगों की गरिमा को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि बाद में कर्नाटक जनता पक्ष बनाने और फिर भाजपा में लौटने के दौरान येदियुरप्पा ने अपने राजनीतिक रुख में बदलाव किया।

एसआईआर के खिलाफ संघर्ष का आह्वान

हरिप्रसाद ने कहा कि देश के लोकतंत्र, संविधान और चुनाव व्यवस्था को स्वतंत्रता संग्राम की विरासत के रूप में सुरक्षित रखना जरूरी है।

उन्होंने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्नाटक में एसआईआर के तहत 5.47 करोड़ मतदाताओं में से 1.7 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि 43 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। वरिष्ठ नागरिकों को भी मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए अधिकारियों के सामने खड़े होने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सभी से एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।

वंदे मातरम् का मुद्दा भी उठाया

हरिप्रसाद ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य गरीबी उन्मूलन या रोजगार का आदान-प्रदान नहीं है। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि 1937 में वंदे मातरम् के पहले दो पदों को अपनाया गया था और 1950 में राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय गीत कहा था। उन्होंने दावा किया कि पिछले 80 वर्षों से इस पर किसी तरह का विरोध नहीं हुआ, लेकिन अब लोगों का ध्यान दूसरे मुद्दों से हटाने के लिए वंदे मातरम् के मुद्दे को सामने लाया जा रहा है।

हरिप्रसाद ने कहा कि कांग्रेस पहले दो पदों को ही गाने के अपने रुख पर कायम रहेगी।

रोजगार और किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा

हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद देश में कई समस्याएं पैदा हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि देश में 72 प्रतिशत स्नातकों के पास रोजगार नहीं है। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल में 72 हजार करोड़ रुपये के ऋण माफ किए गए थे। कॉफी बागानों के लिए 1,200 करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पदयात्रा कर रहे थे, उस समय कई इलाके सूखे से प्रभावित थे, लेकिन वे पंचतारा होटलों में भोजन कर रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बेल्लारी में खनन के आरोपों का सामना करने वालों को मंत्री बनाया गया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम की आलोचना करते हुए हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि इसमें किसानों, मजदूरों, छात्रों, युवाओं के रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों को महीनों तक गिनाया जा सकता है और सवाल किया कि भाजपा की उपलब्धियां क्या हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि “हिंसा और झूठ उनका मंत्र है।”

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश एम.बी.