वीबीजी राम जी योजना में ग्राम पंचायतों को अधिक शक्ति: बसवराज बोम्मई
बेंगलुरु, 09 जनवरी (हि.स.)। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद बसवराज बोम्मई ने विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबीजी जी राम जी) योजना के विरोध को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला है।
बेंगलुरु स्थित भाजपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए बसवराज बोम्मई ने कहा कि कहा कि यह योजना ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार देती है, जिससे ग्रामीण मजदूरों को सीधा लाभ होगा, लेकिन कांग्रेस साजिश के तहत इसका विरोध कर रही है।
उन्होंने कहा कि वीबीजी जी राम जी योजना के तहत काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों को अतिरिक्त रोजगार मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस योजना में ग्राम पंचायतों को काम करने वालों और काम न करने वालों की सूची तैयार करने, ग्रामीण विकास योजनाएं बनाने, योजनाओं को लागू करने और मजदूरी भुगतान तक के पूर्ण अधिकार दिए गए हैं।
ग्राम पंचायतों की शक्तियों में कटौती को लेकर कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए बोम्मई ने कहा कि विधेयक के खंड 16 में ग्राम पंचायतों को पूरी शक्तियां दी गई हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब पंचायतों को अधिकार दिए गए हैं, तो कांग्रेस इसका विरोध क्यों कर रही है?
उन्होंने कहा कि यह योजना विकसित भारत की अवधारणा के तहत 'ग्राम राज्य–राम राज्य के निर्माण के उद्देश्य से तैयार की गई है। बोम्मई ने बताया कि इसके तहत विद्यालय कक्षों के निर्माण की भी व्यवस्था की गई है और कर्नाटक में करीब 30 हजार स्कूल कक्षों के निर्माण की संभावना है। साथ ही, बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने के लिए आधार सीडिंग और डिजिटलीकरण को लागू किया गया है।
पूर्व की मजदूरी योजनाओं में हुई अनियमितताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कालू वेतन योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई थीं, जिस पर गुलबर्गा और बेलगाम में सीबीआई जांच कराई गई थी।
बोम्मई ने कहा कि यह योजना संविधान के 73वें संशोधन का पूर्ण क्रियान्वयन है। उन्होंने ग्राम पंचायत सदस्यों से अपील की कि वे विधेयक को ध्यान से पढ़ें और इसका उपयोग ग्रामीण जनता के हित में करें। कांग्रेस द्वारा योजना को अदालत में चुनौती देने पर उन्होंने कहा कि इससे पार्टी का असली चेहरा सामने आ जाएगा।
परियोजना के नाम को लेकर कांग्रेस की आपत्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए बोम्मई ने कहा, “पहले से ही 80 प्रतिशत परियोजनाएं नेहरू–गांधी परिवार के नाम पर हैं। गांधी के नाम का चुनावों में दुरुपयोग किया गया है। गांधी को राम से अलग नहीं किया जा सकता। इस योजना का नाम राम के नाम पर रखा गया है, इससे गांधी की आत्मा प्रसन्न होगी।”----------------
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश महादेवप्पा