एमएसएफ थीम सॉन्ग विवाद: इमरान खान की तस्वीर को लेकर केरल की राजनीति में घमासान
तिरुवनंतपुरम, 30 जनवरी (हि.स.)। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की छात्र शाखा मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (एमएसएफ) के एक थीम सॉन्ग को लेकर केरल की राजनीति में विवाद गहराता जा रहा है। एमएसएफ के आगामी राज्य सम्मेलन के लिए जारी एक वीडियो में कथित तौर पर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तस्वीर दिखाए जाने के आरोप के बाद सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की छात्र इकाई स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने कड़ी आपत्ति जताई है।
एसएफआई ने इस मामले को मुस्लिम लीग के भीतर कट्टरपंथी राजनीतिक इस्लाम की ओर वैचारिक झुकाव का संकेत बताते हुए आईयूएमएल से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की है। संगठन के राज्य अध्यक्ष एम. शिवप्रसाद और सचिव पी.एस. संजीव के नेतृत्व में एसएफआई ने थीम सॉन्ग की स्क्रीन रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया कि आंतरिक विरोध के बाद वीडियो को “अनिच्छा से हटाया गया।”
हालांकि, एमएसएफ समर्थकों के एक वर्ग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि वीडियो में दिखाई गई तस्वीर इमरान खान की नहीं बल्कि आईयूएमएल के दिवंगत वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ई. अहमद की थी। विपक्षी दलों और एसएफआई ने इस दलील को कमजोर बचाव बताते हुए अस्वीकार कर दिया।
एसएफआई सचिव पी.एस. संजीव ने कहा, “धार्मिक राष्ट्रवाद का समर्थन करने वाले और भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के लिए खतरा माने जाने वाले नेता की तस्वीर का एमएसएफ के वीडियो में दिखना, संगठन के भीतर हो रहे वैचारिक बदलाव को उजागर करता है।”
एसएफआई की आलोचना का मुख्य केंद्र यह आरोप है कि आईयूएमएल के बौद्धिक और राजनीतिक स्पेस पर जमात-ए-इस्लामी हिंद का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। आलोचकों का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से मुस्लिम लीग ने जमात-ए-इस्लामी से दूरी बनाए रखी थी, क्योंकि उसके ‘हुकूमत-ए-इलाहिया’ जैसे विचारों को वह भारत के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा मानती रही है। लेकिन हाल के वर्षों में वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया, जो जमात की राजनीतिक शाखा मानी जाती है, के साथ बढ़ती नजदीकियों ने इस पारंपरिक रुख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एसएफआई अध्यक्ष एम. शिवप्रसाद ने आरोप लगाया कि आईयूएमएल ने दिवंगत पनाक्कड़ सैयद हैदरअली शिहाब थंगल की राजनीतिक विरासत से दूरी बना ली है, जो सांप्रदायिकता के मुखर विरोध और समावेशी राजनीति के प्रतीक माने जाते थे। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “जिस तेजी से जमात-ए-इस्लामी लीग के बौद्धिक स्थान पर कब्जा कर रही है, वह गंभीर चिंता का विषय है।”
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब केरल विधानसभा चुनावों की ओर बढ़ रहा है। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) पहले से ही “जमात–लीग–कांग्रेस” गठजोड़ के आरोपों को चुनावी मुद्दा बनाता रहा है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी हाल में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ पर चुनावी लाभ के लिए “चरमपंथी विचारों को वैधता देने” का आरोप लगा चुके हैं।
दूसरी ओर, एमएसएफ के राज्य नेतृत्व ने इमरान खान से किसी भी जानबूझकर संबंध से साफ इनकार किया है। एमएसएफ के प्रदेश अध्यक्ष सी.के. नजाफ ने आरोपों को “साइबर हमला” और “फर्जी खबर” करार देते हुए कहा कि राज्य सम्मेलन से पहले संगठन की छवि खराब करने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। आईयूएमएल ने भी दोहराया है कि भारतीय संविधान और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता अडिग है।
इस “थीम सॉन्ग विवाद” के बीच बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या मुस्लिम लीग वास्तव में किसी गहरे वैचारिक बदलाव के दौर से गुजर रही है, या फिर यह डिजिटल दौर में हुई चूक, गलत पहचान और एडिटिंग से उपजा मामला है, जिसे राजनीतिक दल चुनावी हथियार के रूप में भुना रहे हैं।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / उदय कुमार सिंह