जोधपुर एयरबेस पर हुई भारत और विदेशी लड़ाकू विमानों के बीच डॉगफाइट और एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग
- 'तरंग शक्ति' युद्धाभ्यास के दौरान 60 से 80 लड़ाकू विमानों ने जटिल हवाई मिशनों को अंजाम दिया
जोधपुर, 01 अक्टूबर (हि.स.)। जोधपुर एयरबेस पर 'तरंग शक्ति' युद्धाभ्यास के दौरान आसमान में हैरतअंगेज नजारे देखने को मिल रहे हैं। हवाई अभ्यास के दौरान एक साथ 60 से 80 लड़ाकू विमानों ने जटिल हवाई मिशनों को अंजाम दिया, जिसके चलते पश्चिमी राजस्थान का एयरस्पेस किसी वास्तविक युद्ध क्षेत्र की तरह नजर आने लगा।
अभ्यास के तहत लार्ज फोर्स एम्प्लॉयमेंट के जरिए विभिन्न श्रेणियों और ताकतों के विमानों का एक बड़ा पैकेज तैयार किया गया, जिसमें लड़ाकू विमानों को अलग-अलग फोर्स पैकेज में बांटकर कहीं दुश्मन के हवाई हमले को रोकने का अभ्यास किया गया, तो कहीं अपने विमानों को सुरक्षित लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए हवाई सुरक्षा कवच तैयार किया गया। इससे पहले के चरण में भारत और विदेशी लड़ाकू विमानों के बीच वन-ऑन-वन और टू-ऑन-वन जैसी कठिन डॉगफाइट और एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग हुई। इस युद्धाभ्यास को सबसे खास विभिन्न देशों के अत्याधुनिक फाइटर जेट्स के एक साथ संचालन ने बनाया। जिसमें कई देशों के प्रमुख लड़ाकू विमान शामिल हैं।
फ्रांस और भारत के राफेल, अमेरिका का एफ-35 और भारतीय वायु सेना के तेजस व सुखोई-30 एमकेआई जैसे शक्तिशाली लड़ाकू विमानों ने एक ही युद्ध क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। इस बड़े ऑपरेशन में केवल फाइटर जेट ही नहीं, बल्कि एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग यानी हवा में ईंधन भरना, एयरलिफ्ट और अन्य सपोर्ट मिशनों को भी शामिल किया गया। यह बड़ा ऑपरेशनल अभ्यास केवल जोधपुर तक सीमित नहीं था। जोधपुर के साथ-साथ राज्य के अन्य प्रमुख एयरबेस भी इस विशाल नेटवर्क का हिस्सा रहे, जिसमें नाल, उतरलाई, जैसलमेर, फलोदी एयरबेस भी शामिल रहे। इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य एक विशाल हवाई अभियान के दौरान अलग-अलग देशों की वायु सेनाओं, विभिन्न प्रकार के विमानों और तकनीकों के बीच आपसी तालमेल को परखना और मजबूत करना है।
अभ्यास के दौरान अमेरिकी वायु सेना, भारतीय वायु सेना और अन्य भाग लेने वाले देशों के साथ मिलकर संयुक्त ट्रेनिंग कर रहे हैं। इसका उद्देश्य बहुराष्ट्रीय हवाई अभियानों की कार्यप्रणाली को समझना और साझा अनुभव विकसित करना है। एक अमेरिकी एफ-35ए पायलट ने कहा कि दुनिया की अलग-अलग वायु सेनाओं के साथ उड़ान भरने से अलग-अलग रणनीतियों, दृष्टिकोण और संचालन के तरीकों को समझने का अवसर मिलता है। इससे पायलट एक-दूसरे से सीखते हैं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संयुक्त अभियानों के लिए बेहतर तरीके से तैयार होते हैं।------------------------------
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश