एआई से होगी भारत की अगली कृषि क्रांति: जितेन्द्र सिंह

 


नई दिल्ली, 22 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत की अगली कृषि क्रांति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित होगी। एआई कृषि नीति, अनुसंधान और निवेश का प्रमुख आधार बन रहा है।

जितेन्द्र सिंह ने मुंबई में आयोजित एआई4एग्री शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन में कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है।

जितेन्द्र सिंह ने कहा कि एआई पहली बार कृषि क्षेत्र की पुरानी समस्याओं का बड़े स्तर पर समाधान दे रहा है। इसमें मौसम की अनिश्चितता, सूचना की कमी और बिखरे बाजार जैसी चुनौतियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एआई उत्पादकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि एआई के उपयोग से किसानों को हर वर्ष लगभग 70 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। यदि प्रत्येक किसान को बेहतर सलाह से 5 हजार रुपये की बचत होती है तो यह बड़ी आर्थिक उपलब्धि होगी। उन्होंने बताया कि देश में 14 करोड़ कृषि जोत हैं। इनमें अधिकांश छोटे और सीमांत किसान हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार 10372 करोड़ रुपये के इंडिया एआई मिशन के माध्यम से डिजिटल क्षमता, डाटा और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रही है। भारतजेन पहल के तहत एग्री परम नामक कृषि मॉडल विकसित किया गया है। यह 22 भारतीय भाषाओं में किसानों को सलाह देता है।

मंत्री ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग एआई ओपन स्टैक विकसित कर रहा है। इससे देश में विकसित कृषि एआई समाधान एकीकृत ढांचे से जुड़ सकेंगे। राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान आईआईटी, आईआईएससी और आईसीएआर के साथ मिलकर कृषि एआई पर अनुसंधान को बढ़ावा दे रहा है।

उन्होंने कहा कि ड्रोन और उपग्रह तकनीक से मृदा स्वास्थ्य कार्ड और स्वामित्व योजना को मजबूत किया जा रहा है। इससे भूमि और मिट्टी का सटीक डाटा मिल रहा है। इसके साथ एआई आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित की जा रही है। इससे किसान समय पर निर्णय ले सकेंगे।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत विस्तार पहल का प्रस्ताव किया गया है। यह बहुभाषी एआई उपकरण होगा। इससे किसानों को उनकी फसल, मिट्टी और क्षेत्र के अनुसार सलाह मिलेगी। इसका उद्देश्य जोखिम कम करना और उत्पादकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय कृषि एआई अनुसंधान नेटवर्क स्थापित करेगी। इसमें केंद्र, राज्य, अनुसंधान संस्थान और अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल होंगे। इसका उद्देश्य कृषि, मिट्टी और जलवायु से जुड़े डाटा का राष्ट्रीय ढांचा तैयार करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर