राज्यों को केंद्र की सफल शासन व्यवस्थाएं अपनानी चाहिए : जितेंद्र सिंह

 


नई दिल्ली, 17 जून (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने राज्यों से केंद्र सरकार द्वारा विकसित की गई सफल प्रशासनिक और डिजिटल शासन प्रणालियों को अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि केंद्र की कई पहल न केवल देश में सुशासन का मॉडल बनी हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी सराहना हो रही है। इन व्यवस्थाओं को राज्यों में लागू कर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सकता है।

डॉ. सिंह ने बुधवार को कर्तव्य भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी सरकार में शासन व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया है। पहले प्रशासनिक सुधार केवल सरकारी प्रक्रियाओं तक सीमित रहते थे, लेकिन अब वे सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के प्रभावी साधन बन चुके हैं।

मंत्री ने बताया कि मिशन कर्मयोगी, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट, ई-ऑफिस और अन्य तकनीक आधारित प्रणालियों ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाया है। इससे आम लोगों को सरकारी सेवाएं आसानी से और कम समय में मिल रही हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में लागू की गई स्व-प्रमाणन व्यवस्था ने आम नागरिकों को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाई। यह सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम था। इसी तरह ग्रुप-बी (गैर राजपत्रित) और ग्रुप-सी पदों पर इंटरव्यू समाप्त करने से भर्ती प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनी है।

डॉ. सिंह ने बताया कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए आधार आधारित सत्यापन, कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं और नकल रोकने के लिए नए कानून लागू किए हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय रोजगार मेले के माध्यम से अक्टूबर 2022 से अब तक 19 कार्यक्रमों में 12 लाख से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, दिव्यांगजनों और अन्य वंचित वर्गों को सरकारी नौकरियों में अधिक अवसर देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इससे सरकारी सेवाओं में समान भागीदारी सुनिश्चित हुई है।

मंत्री ने मिशन कर्मयोगी को दुनिया के सबसे बड़े सिविल सेवा सुधार कार्यक्रमों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि ई-जीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 1.65 करोड़ से अधिक अधिकारी और कर्मचारी पंजीकृत हैं तथा लगभग 13 करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। अब इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे सरकारी कर्मचारियों को आधुनिक और बेहतर प्रशिक्षण मिल रहा है।

पेंशनभोगियों के लिए किए गए सुधारों पर उन्होंने कहा कि डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट और फेस रिकग्निशन तकनीक ने बुजुर्गों का जीवन आसान बनाया है। अब उन्हें जीवित प्रमाण पत्र जमा करने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। इसके अलावा पेंशन अदालत, ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली और अन्य डिजिटल सेवाओं के माध्यम से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने भ्रष्टाचार रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और प्रशासन को अधिक संवेदनशील बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन सुधारों ने जनता का विश्वास मजबूत किया है और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया है।

उन्होंने विश्वास जताया कि यदि राज्य सरकारें भी केंद्र की इन सफल पहलों को अपनाती हैं, तो देश में सुशासन को और मजबूती मिलेगी तथा विकसित भारत 2047 का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल किया जा सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी