ग्रासरूट इनोवेटर्स को औपचारिक नवाचार तंत्र से जोड़ने की जरूरत : डॉ. जितेंद्र सिंह

 


नई दिल्ली, 31 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की अगली विकास यात्रा प्रयोगशालाओं और बड़े शहरों से नहीं बल्कि गांवों, छोटे कस्बों और समुदाय आधारित नवाचारों से आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि ग्रासरूट इनोवेटर्स को देश के औपचारिक नवाचार तंत्र से जोड़ना आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहद आवश्यक है।

राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित ग्रासरूट इनोवेटर रिकॉग्निशन सेरेमनी-2026 को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि स्थानीय नवाचारों को केवल सम्मानित करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए बल्कि वैज्ञानिक सत्यापन, तकनीकी विकास, इनक्यूबेशन और बाजार तक पहुंच के जरिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर के सफल उद्यमों में बदला जाना चाहिए।

यह समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में देश के 26 ग्रासरूट इनोवेटर्स को कृषि, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन, सहायक प्रौद्योगिकी, सर्कुलर इकोनॉमी और सतत आजीविका जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक एवं किफायती नवाचारों के लिए सम्मानित किया गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण कर नवाचार को जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने बताया कि अटल इनोवेशन मिशन के माध्यम से ग्रामीण, जनजातीय, पहाड़ी, तटीय और दूरदराज के क्षेत्रों के नवाचारकर्ताओं को भी राष्ट्रीय नवाचार तंत्र से जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि देश में 2.4 लाख से अधिक स्टार्टअप हैं, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। हालांकि नवाचार की वास्तविक सफलता का पैमाना यह होगा कि तकनीक किसानों, महिलाओं, कारीगरों और आम नागरिकों की समस्याओं का सस्ता और प्रभावी समाधान बन सके।

डॉ. सिंह ने बताया कि अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर समुदाय आधारित नवाचारों को मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन, तकनीकी सहायता और बाजार से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में 25 एसीआईसी संचालित हैं और 25 अन्य विकसित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों ने अब तक 2,500 से अधिक ग्रासरूट इनोवेटर्स को सहयोग प्रदान किया है।

उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योग और सरकारी एजेंसियों से मिलकर कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक नवाचार को बौद्धिक संपदा संरक्षण, परीक्षण, प्रमाणन, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि स्थानीय विचार राष्ट्रीय स्तर के उत्पाद बनकर देश के विकास में योगदान दे सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी