युवा रोजगार और व्यक्तिगत सफलता के साथ सामाजिक सरोकारों और नागरिक दायित्वों के प्रति भी रहें जागरूक : जे. नन्द कुमार

 






युवा व्यवसायी संवाद में राष्ट्र निर्माण और नागरिक कर्तव्य पर रहा जोर

बौद्धिक के बाद युवाओं की जिज्ञासाओं के दिए गए जवाब, पर्यावरण और सामाजिक समरसता पर भी हुई चर्चा

झांसी, 06 सितंबर (हि.स.)। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में युवा सम्मेलन समिति, झांसी महानगर की ओर से रविवार को ‘युवा व्यवसायी संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पंडित दीनदयाल सभागार में शाम चार से छह बजे तक आयोजित कार्यक्रम में युवाओं से राष्ट्र निर्माण, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और परिवार प्रबोधन जैसे विषयों पर संवाद किया गया। बौद्धिक सत्र के बाद युवाओं ने विभिन्न विषयों से जुड़े 15 सवाल पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने विस्तार से जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया। अंत में राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। मंच पर विभाग संघ चालक शिव कुमार भार्गव और महानगर संघ चालक सतीश शरण भी मंचासीन रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और वन्दे मातरम के साथ हुआ। मुख्य वक्ता संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार रहे। उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए भारतीय संस्कृति में निहित उन विचारों और मूल्यों को विस्तार से समझाया, जो समाज और राष्ट्र के कल्याण का आधार माने जाते हैं। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसे विचारों की व्याख्या करते हुए कहा कि भारतीय चिंतन केवल अपने कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण विश्व के सुख और शांति की कामना करता है। उन्होंने कहा कि हमें हिन्दू होने पर गर्व महसूस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत हिन्दू राष्ट्र था, है और रहेगा। अब अखण्ड भारत बनकर रहेगा। इसके लिए अविराम रूप से कार्य चल रहा है।

जे. नंदकुमार ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में इन मानवीय और सार्वभौमिक विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि विश्व के कल्याण के लिए युद्ध का रास्ता नहीं, मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के विचारों और ज्ञान का मार्ग अपनाने की आवश्यकता है। सनातन संस्कृति सदैव से शांति, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण की भावना को पोषित करती रही है। उन्होंने युवा की परिभाषा को विस्तार पूर्वक समझाया।

संवाद के दौरान युवाओं को देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया। मुख्य वक्ता ने कहा कि युवा केवल रोजगार और व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक सरोकारों और नागरिक दायित्वों के प्रति भी जागरूक रहें।

कार्यक्रम में युवा व्यवसाइयों की सहभागिता विशेष रही। बौद्धिक सत्र के बाद प्रश्नोत्तर के माध्यम से उनके मन में उठ रहे विभिन्न सवालों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ते हुए समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी भूमिका को अधिक प्रभावी बनाना रहा।

संघ की कार्यपद्धति और युवाओं का दायित्व

जे. नंदकुमार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक पद्धति का उल्लेख करते हुए बताया कि व्यक्ति से व्यक्ति संवाद, साथ बैठना, खेलना, सीखना और साथ काम करना संघ की कार्यपद्धति का अहम हिस्सा है। इसी सहज संवाद के कारण संगठन डिजिटल युग की पीढ़ी से अपनी मूल प्रकृति बचाए रखते हुए जुड़ रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल रोजगार और व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक सरोकारों के प्रति भी जागरूक रहें। देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है, जिसके लिए आत्मविश्वास, दृढ़ निश्चय, साहस और निर्भीकता जैसे गुण अत्यंत आवश्यक हैं। कार्यक्रम में प्रस्तावना योवेश पांचाल संचालन सह विभाग कार्यवाह शशिकांत व एकल गीत उपेन्द्र बबेले ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय सह-कार्यवाह अनिल श्रीवास्तव, प्रांत कार्यवाह रामकेश ,सह-प्रांत प्रचारक कानपुर प्रान्त मुनीश, विभाग कार्यवाह धर्मेंद्र, विभाग प्रचारक मनोज, महानगर संघचालक सतीश शरण, महानगर कार्यवाह मुकुल, सह महानगर कार्यवाह जयपाल, महानगर प्रचारक यश, महानगर सायं प्रचारक मयंक, विभाग प्रचार प्रमुख मनोज टाटा,महानगर प्रचार प्रमुख डॉ. जितेन्द्र मिश्रा एवं महानगर में निवासरत समस्त प्रांतीय, विभागीय व महानगर स्तर के दायित्वधारी स्वयंसेवकों के साथ सैंकड़ो की संख्या में युवा शक्ति उपस्थित रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया